कोडीन युक्त कफ सिरप प्रकरण में खेल के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल को संरक्षण देने वाले नेताओं व अन्य बड़े लोगों पर जांच एजेंसियों की मेहरबानी रही है। आरोपियों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। खासकर अवैध संपत्तियों के जब्तीकरण को लेकर। सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच एजेंसियां इतने बड़े मामले में खेल से जुड़े लोगों पर मेहरबानी क्यों कर रही हैं।
जब सिरप सिंडिकेट का खुलासा हुआ था, तब शुभम जायसवाल व अन्य कई आरोपियों का कनेक्शन राजनेताओं से उजागर हुआ था। फोटो व वीडियो भी सामने आए थे। सूत्रों के मुताबिक, उनकी शह पर आरोपियों ने अवैध कारोबार खड़ा किया था, जिसमें उनकी भी भूमिका रही थी।
यहां तक कि बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की भी मिलीभगत का खुलासा हुआ था। उसे भी जेल भेजा गया था। ईडी ने भी मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। यहां तक कि आलोक सिंह की संपत्तियों को भी चिह्नित किया गया था। अब तक उन संपत्तियों को जब्त नहीं किया गया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि आरोपियों व उनके शह देने वालों पर नरमी बरती जा रही है। इसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
