इटावा/ चकरनगर। मध्यप्रदेश और राजस्थान में लगातार हो रही बारिश के बाद चंबल नदी की सहायक काली सिंध नदी पर बने नवनेरा बैराज से 4.15 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बुधवार को इसका असर जिले में दिखाई देने लगा। बुधवार शाम चंबल का जलस्तर 114 तक पहुंच गया। चंबल नदी का चेतावनी निशान 119.8 मीटर पर और खतरे का निशान 120.8 मीटर पर है।
जिले में सुबह से ही चंबल नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा। चकरनगर क्षेत्र में शाम करीब पांच बजे तक जलस्तर बढ़ने से चंबल का पानी खाली स्थानों में पड़ी रेत को ढकते हुए खारों में घुसने लगा। चंबल के बढ़ते जलस्तर को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग चंबल पुल पर पहुंच पर भी पहुंचे। लोग नदी के बढ़ते पानी को मोबाइल में कैद करते नजर आए। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से नदी किनारे बसे सहसों, भरेह, कांयछी, चकरपुरा, कंधेशीघार, हरौली बहादुरपुर घार, लालपुरा, नीमाडाडा, हरपुरा और पालीघार समेत 40 गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। तहसील प्रशासन ने भी बढ़ते जलस्तर की स्थिति पर नजर रखते हुए सभी 14 बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की तैनाती कर अलर्ट कर दिया है। उन्हें जलस्तर की निगरानी के निर्देश दिए है।
वर्जन
चंबल नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पानी छोड़े जाने की जानकारी उन्हें मिली है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सभी बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को तैनात कर अलर्ट किया गया है। – रोहित कुमार मौर्य, एसडीएम चकरनगर
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बांध से छोड़ा गया पानी अभी इटावा क्षेत्र तक नहीं पहुंचा है। रात या सुबह तक पानी पहुंचने की संभावना है। इसके बाद चंबल नदी के जलस्तर और भी तेजी से बढ़ सकता है। – राहुल तोमर, जेई चंबल जल आयोग, उदी
