इटावा। फर्जी दस्तावेजों से फर्म बनाकर बिजली निगम का ठेका लेने और एक्सईएन, लेखाधिकारी से मिलकर 2017 में 59 लाख रुपये का भुगतान कराने के मामले में कोर्ट के आदेश पर फ्रेंड्स कॉलोनी में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह प्राथमिकी अधिवक्ता अजय द्विवेदी की ओर से आरटीआई से बिजली निगम से मांगी गई जानकारी के आधार पर दर्ज की गई है।

अधिवक्ता अजय द्विवेदी ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत बिजली निगम में आरटीआई लगाई थी। उनका दावा है कि इसमें पता चला कि अशोक नगर शहरिया निवासी सचिन चौधरी ने वर्ष 2016 में दद्दा जी इंफ्रास्ट्रक्चर नाम से फर्म का पंजीकरण कराया था। पता चला कि फर्म के पंजीकरण से संबंधित प्रमाणपत्र में वर्ष को लेकर ओवरराइटिंग की गई। साथ ही हैसियत प्रमाणपत्र के स्थान पर अधिकार पत्र का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। अधिकार पत्र 24 जून 2016 को तैयार कराया गया, जबकि फर्म के पंजीकरण प्रमाणपत्र पर 20 अप्रैल 2016 की तारीख अंकित हैं। इसके अलावा पंजीकरण प्रक्रिया में लगाए गए चरित्र प्रमाणपत्र को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। चरित्र प्रमाणपत्र पांच अक्तूबर 2015 का दर्शाया गया है, जबकि उससे संबंधित अधिकार पत्र के लिए इस्तेमाल स्टांप 24 जून 2016 को औरैया से खरीदा गया व उसी दिन इटावा कचहरी में नोटरी कराए जाने का उल्लेख है। विद्युत विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कागजों में कार्य दर्शाकर भुगतान कराया गया। शिकायतकर्ता ने आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आने का दावा किया है।

आरटीआई की ओर से दी गई जानकारी में 2017 में 59 लाख रुपये का भुगतान फर्म को करने की बात कही गई है। अजय द्विवेदी के अनुसार, विभाग के अधिकारियों की संलिप्ता की वजह से जानकारी पूरी नहीं दी गई है। आरोपी फर्म के अनुसार, करोड़ों रुपये का खेल किया गया है।

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कई सालों तक घुमाने के बाद दिया जवाब

अधिवक्ता अजय द्विवेदी ने आरोप लगाया कि वह 2016 से ही आरटीआई के जरिए जानकारी चाह रहे थे। कई बार आरटीआई डाली, फिर भी विभाग जानकारी देने को तैयार नहीं था। दावा किया कि 2018 में विभाग ने सिर्फ 59 लाख के भुगतान की बात बताई है। इसमें किस योजना के तहत काम दिया गया था, इसका तक जिक्र नहीं है। कहा कि शिकायत अप्रैल को रजिस्टर्ड डाक से एसएसपी को भेजी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज हुई है।

विभागीय कार्यों और भुगतान की भी जांच होगी

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कई कामों को बिना कराए ही करा लिया भुगतान

अधिवक्ता ने फर्म पर आरोप लगाते हुए बताया कि बिजली निगम के अधिकारी फंस रहे हैं। इसलिए पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है। दावा किया कि बिजली विभाग में विभिन्न कार्यों के पैकेज स्वीकृत करके कई कामों को कागजों में दिखाकर भुगतान करा दिया गया। बिजली विभाग के एसई ऋषभ देव ने बताया कि मामला संज्ञान में है, लेकिन प्राथमिकी दर्ज होने की बात पता नहीं चली थी। उस समय के अधिकारियों की जानकारी कराकर उच्चाधिकारियों से निर्देश प्राप्त करके जांच कराई जाएगी।

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कोर्ट के आदेश पर फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

– बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसएसपी



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