Following the search for Sita and the burning of Lanka, the venue resounded with chants in praise of Lord Rama.

फोटो 12: श्रीरामलीला महोत्सव में लीला का मंचन करते कलाकार। स्रोत आयोजक

बकेवर। लखना में चल रहे ऐतिहासिक श्रीरामलीला महोत्सव में सीता खोज और लंका दहन के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन हुआ। कलाकारों ने भगवान श्रीराम के प्रति हनुमान की भक्ति, समर्पण और वीरता का सजीव चित्रण कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


लीला के दौरान रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। मंचन में माता सीता की खोज में निकले वानर दल का प्रसंग दिखाया गया। जामवंत के प्रेरित करने पर हनुमान समुद्र लांघकर लंका पहुंचे। वहां अशोक वाटिका में माता सीता को खोजकर उन्होंने भगवान श्रीराम की मुद्रिका दी। इसके बाद हनुमान ने अशोक वाटिका में फल खाए और वृक्षों को उजाड़ दिया।

रावण के सैनिकों ने उन्हें पकड़कर दरबार में पेश किया, जहां रावण के आदेश पर उनकी पूंछ में आग लगा दी गई। इसके बाद हनुमान ने जलती पूंछ से सोने की लंका में आग लगा दी। लंका दहन का दृश्य देखकर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इस लीला प्रारंभ होने से पूर्व अरविंद पोरवाल ने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीरामचंद्र जी की आरती की।

इसके बाद रामलीला समिति के अध्यक्ष विनोद कुशवाहा, महामंत्री संदीप पाल, कोषाध्यक्ष प्रमोद जैन,संजीव त्रिपाठी,रामनरेश त्रिपाठी,संदीप वर्मा सोनू सर्राफा आदि रहे।



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