इटावा/लवेदी। लगातार हो रही बारिश अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। इससे जिले में जहां एक ओर मकानों की छत और दीवारें गिरने की घटनाएं सामने आने लगी हैं, वहीं दूसरी ओर खेतों में जलभराव से बाजरा की फसल पर संकट गहराने लगा है। जिले में बीते 24 घंटे में 92 एमएम बारिश रिकाॅर्ड की गई है।
महेवा क्षेत्र के ग्राम लाखी अन्दावा निवासी रमेश बाबू के घर की पक्की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय घर में मौजूद उनकी पुत्री वंदना मलबे की चपेट में आकर घायल हो गई। सूचना मिलने पर लेखपाल विवेक यादव ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने पीड़ित परिवार से जानकारी लेने के साथ ही मकान को हुए नुकसान का जायजा लिया। वहीं ग्राम लालपुर में रेखा देवी पत्नी पवन कुमार के मकान की दीवार गिरने की सूचना पर अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय जांच की। लगातार बारिश के कारण पुराने और कमजोर मकानों में नमी बढ़ने से दीवारों व छतों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कराकर पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
लगातार बारिश ने किसानों की भी चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल के लिए बारिश राहत और संजीवनी साबित हो रही है, लेकिन करीब 35 हजार हेक्टेयर में होने वाली बाजरा की फसल पर जलभराव का संकट मंडरा रहा है। जिले में धान का रकबा करीब 66 हजार हेक्टेयर निर्धारित है। लवेदी क्षेत्र के नवादा, चिंडौली, बहादुरपुर, जैतपुरा और असदपुर समेत कई गांवों में बाजरा की खड़ी फसल पानी में डूबी हुई है। लंबे समय से खेतों में पानी भरा रहने से पौधों में पीलापन आने लगा है और कई स्थानों पर फसल सड़ने की स्थिति में पहुंच गई है। किसानों का कहना है कि दोमट और बलुई मिट्टी सामान्य दिनों में पानी जल्दी सोख लेती है, लेकिन लगातार बारिश से मिट्टी की क्षमता कम हो गई है। किसान विनोद सिंह तोमर, राकेश सिंह और रणवीर सिंह ने बताया कि बाजरा की फसल में काफी लागत लगाई गई है। फसल खराब होने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित खेतों का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
