फतेहपुर। जिला अस्पताल में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए बना स्वतंत्र फीडर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से बंद है। बिजली कटौती के समय जिला अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है। बिजली आपूर्ति के लिए लगा जनरेटर भी पूरे अस्पताल का लोड नहीं उठा पा रहा है। ऐसी स्थिति में वार्डों की बिजली काटकर डाक्टर व अन्य कक्षों में आपूर्ति दी जाती है। गर्मी के मौसम में रोगी वार्डों में कराहते रहते हैं।
2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की सरकार ने प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों को 24 बिजली आपूर्ति के आदेश जारी किए थे। इसके लिए ट्रांसमिशन से स्वतंत्र फीडर बनाकर जिला अस्पताल में आपूर्ति देने का प्रावधान था। पहली किश्त में सरकार ने फीडर तैयार करने के लिए 75 लाख का बजट आवंटित किया था। सरकार गिरने के बाद दूसरी सरकार में बिजली विभाग ने दोबारा प्रस्ताव बनाकर 30 लाख की दोबारा मांग की। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 2006 में धनराशि आवंटित की। बिजली विभाग ने फीडर तो बना दिया, लेकिन आपूर्ति नहीं शुरू की। 2012 में नई सरकार बनने पर तत्कालीन सांसद राकेश सचान के प्रयास से जिला अस्पताल में 24 घंटे आपूर्ति शुरू हुई। किसी तरह पांच साल जिला अस्पताल को आपूर्ति मिली, लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते फिर जिला अस्पताल को आम उपभोक्ताओं की तरह आपूर्ति मिलना शुरू हो गया। नई सरकार को सात साल पूरे होने को हैं, लेकिन स्वतंत्र फीडर चालू नहीं हो पाया। बिजली कटौती के दौरान जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा। अस्पताल बंद होने के बाद जनरेटर भी नहीं चलाया जाता। ऐसे में रात-रातभर मरीज जागकर बिताते हैं। अधिशासी अभियंता प्रथम राजमंगल सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल का स्वतंत्र फीडर चालू करने रेलवे लाइन बाधक बनी है। बिना रेलवे की अनुमति के ध्वस्त फीडर की लाइन की मरम्मत संभव नहीं है। छह साल से करीब एक करोड़ की लागत से बने बंद पड़े फीडर को चालू करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल का फीडर चालू करने के लिए बिजली विभाग से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। फीडर चालू होने पर ही निर्बाध विद्युत आपूर्ति संभव है। जनरेटर चलाने में कुछ मिनटों का वक्त लगता है। ऐसे में बिजली आपूर्ति में रुकावट नहीं आए, इसलिए अभी तत्काल में अस्पताल में एक-दो दिनों में नया इनवर्टर लगा दिया जाएगा।
-आरपी सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
