फतेहपुर। एमआरएफ सेंटरों के निर्माण में नगर पालिका का करीब एक करोड़ पानी में चला गया, क्योंकि इन सेंटरों में कूड़ा निस्तारण के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही हैं।

दो साल से चालू एक एमआरएफ सेंटर में महज एक बोरी खाद तैयार हुई। वहीं, दो एमआरएफ सेंटरों पर एक साल से ताला लटका है।

नगर पालिका शहर से निकलने वाले 55 टन कूड़ा के निस्तारण के लिए एमआरएफ सेंटरों का निर्माण कराने में पूरा जोर लगा रही है। अब तक चालू एक मात्र एमआरएफ सेंटर कूड़ा निस्तारण में खरा नहीं उतरा है।

पोस्टमार्टम हाउस के पीछे संचालित एमआरएफ सेंटर में छह कर्मचारी कूड़ा-छंटनी और खाद निर्माण के लिए तैनात हैं। यहां दो साल पहले लगी कूड़ा निष्पादन की मशीने कुछ घंटे ही चली है। यहीं वजह है कि दो साल से यहां पर एक बोरी खाद ही बनी है। ऐसे में शहर को साफ रखने की चुनौती बरकरार है। बता दें कि एक एमआरएफ सेंटर चालू हालत में है और अजगवां और मिठनापुर के एमआरएफ सेंटरों पर ताला लटका है। मलाका के समीप एक एमआरएफ सेंटर निर्माणाधीन है।

शहर के सभी 34 वार्डों से प्रतिदिन 55 टन कूड़ा निकलता है। यह कूड़ा नगर पालिका खाली पड़ी जमीन, खाली प्लाट और शहर के आसपास की सड़कों के किनारे खंतियों में डालती है। निस्तारण की व्यवस्था नहीं हुई तो नगर पालिका से सामने बहुत जल्द कूड़ा डंप करने के लिए जमीन नहीं होगी।

पोस्टमार्टम हाउस के पीछे स्थित एमआरएफ सेंटर में छह कर्मचारी हैं। इनके वेतन पर नगर पालिका 60 हजार हर महीने खर्च करती है। इतना ही नहीं 1500 रुपये हर माह बिजली के बिल पर खर्च हो रहे है। एक डंपर में करीब 10 टन कूड़ा एक सप्ताह में आता है। इससे प्लास्टिक और कांच, लोहे की छंटनी की जाती है। प्लास्टिक, लोहा और कांच के टुकड़ों की नीलामी की योजना है।

एक एमआरएफ सेंटर की क्षमता पांच मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारण करने की है। लोगों में जागरुकता के अभाव के कारण अपेक्षा के मुताबिक सफलता नहीं मिल रही है। अगर लोग सूखा व गीला कूड़ा अलग देना प्रारंभ कर दें, तो सभी एमआरएफ सेंटर क्षमता के मुताबिक काम करना शुरू कर देंगे। -समीर कुमार कश्यप, ईओ नगर पालिका



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