फतेहपुर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में शुक्रवार को दो दिवसीय नवाचार एवं बेस्ट प्रैक्टिसेस कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इसमें शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, केस स्टडी और एससीईआरटी के उद्गम पोर्टल के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही विभिन्न विद्यालयों में अपनाए जा रहे नवाचारों को साझा किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ डायट प्राचार्य एवं उप शिक्षा निदेशक माया राम ने किया। उन्होंने कहा कि नवाचार छोटा हो या बड़ा, उसका उद्देश्य सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। डायट परिसर में भी कई नवाचार लागू किए जा रहे हैं, जिनका असर अगले एक वर्ष में दिखाई देने लगेगा। उन्होंने शिक्षकों से समस्याओं से पीछे हटने के बजाय उनके ठोस समाधान तलाशने की अपील की।

सेवारत प्रशिक्षण प्रभारी विनय कुमार मिश्र ने कहा कि नवाचार का अर्थ नए व्यवहार और सकारात्मक बदलाव से है। इसके माध्यम से विद्यालयों में शैक्षिक स्तर सुधारने के साथ शिक्षा को समुदाय से भी जोड़ा जा सकता है।

तकनीकी सत्र में डॉ. सुनील तिवारी ने प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि परियोजना आधारित शिक्षण से बच्चे व्यावहारिक रूप से समस्याओं को समझते हैं और स्वयं सीखने का प्रयास करते हैं। इससे रटंत प्रणाली से मुक्ति मिलती है।

संदर्भदाता विपिन त्रिपाठी ने उद्गम पोर्टल की जानकारी देते हुए शिक्षकों से अपने नवाचारों को पोर्टल पर पंजीकृत कराने की अपील की, ताकि उनका दस्तावेजीकरण हो सके और दूसरे शिक्षक भी उनसे प्रेरणा ले सकें।

कार्यशाला में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए। संस्थान की वरिष्ठ प्रवक्ता आरती गुप्ता, अजीत निगम, राकेश सचान और शशांक शुक्ल ने प्रशिक्षण सत्रों में शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।

फोटो-17-फतेहपुर: डायट में आयोजित कार्यशाला के दौरान संबोधित करते प्राचार्य। स्रोत: स्वयं

फोटो-17-फतेहपुर: डायट में आयोजित कार्यशाला के दौरान संबोधित करते प्राचार्य। स्रोत: स्वयं



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