थरियांव/धाता (फतेहपुर)। धान की खरीद शुरू होते ही बाजार में मोटे धान के मुकाबले पतला धान करीब दोगुने दाम पर बिक रहा है। बेहतर कीमत मिलने से किसानों का रुझान पतली प्रजातियों की ओर बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि मोटे धान के कम दाम से लागत निकालना मुश्किल हो रहा है, जबकि पतले धान की बिक्री से बेहतर आमदनी हो रही है।

थरियांव क्षेत्र में ताज धान का भाव गांवों में 33 रुपये और मंडियों में 37 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। आरएस-10 धान 32 से 36 रुपये और शरबती 33 से 37 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। वहीं मोटे धान की कीमत गांवों में 17 रुपये और मंडियों में करीब 19 रुपये प्रति किलो है।

धाता क्षेत्र में भी पतले धान का भाव 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। मोटा धान 1600 से 1750 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। किसान यूनियन के रबी सिंह, महेश फौजी और अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मोटे धान की खेती में खाद, पानी, जुताई, मजदूरी और दवाओं पर काफी खर्च करना पड़ता है।

इसके बावजूद किसानों को उचित कीमत नहीं मिल रही है। दूसरी ओर पतले धान के अच्छे भाव से कुछ बेहतर आमदनी हो रही है। उनका कहना है कि पतली प्रजातियों की खेती में पानी और खाद की जरूरत भी अपेक्षाकृत कम पड़ती है। ऐसे में किसान अगले साल पतले धान का रकबा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने में परेशानी

किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री में आ रही दिक्कतों को भी उठाया। उनका कहना है कि ऑनलाइन पंजीकरण और टोकन व्यवस्था के तहत एक बीघा जमीन पर केवल पांच क्विंटल धान बेचने का टोकन मिल रहा है। इससे पूरी उपज सरकारी केंद्रों पर नहीं बिक पाती और शेष धान गांवों में व्यापारियों को कम कीमत पर बेचना पड़ता है। किसानों ने क्रय केंद्रों पर खरीद की सीमा बढ़ाने की मांग की है, ताकि उन्हें उपज का उचित मूल्य मिल सके और व्यापारियों पर निर्भरता कम हो।

फोटो-25- फतेहपुर:- थरियांव में एक खेत में रखा धान। संवाद

फोटो-25- फतेहपुर:- थरियांव में एक खेत में रखा धान। संवाद



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