राजधानी लखनऊ में निर्वाण संस्था में पांच दिन में पांच बच्चों की मौत हो चुकी है। खुलासा हुआ है कि सबसे पहले किशोरी सरोजनी (16) की मौत हुई थी। इस घटना को संचालक ने छिपा लिया था। आरोप है कि न तो प्रशासन को सूचना दी गई और न ही पोस्टमार्टम कराया गया, बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस बच्ची की मौत की जानकारी के बाद बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या पांच हो गई है।

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बलरामपुर अस्पताल प्रबंधन के अनुसार संस्था में रहने वाली एक किशोरी को 21 मार्च को अस्पताल लाया गया था। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस मौत की जानकारी अस्पताल के ब्रॉड डेड रजिस्टर में दर्ज है। संस्था के जिम्मेदारों ने इसी मौत की सूचना तक प्रशासन को नहीं दी।

संस्था के जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया

निर्वाण संस्था पीपीपी मॉडल पर संचालित है। मानसिक कमजोर, अनाथ व लावारिस बच्चों को यहां रखा जाता है। यहां 147 बच्चे हैं। ज्यादातर की उम्र 10 से 18 साल के बीच है। बीते एक हफ्ते से संस्था के बच्चे बीमार हैं। बच्चे उल्टी-दस्त, पेट दर्द की शिकायत कर रहे थे। आरोप है शुरुआत में संस्था के जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। 

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उल्टी-दस्त और पेट दर्द से जब बच्चे अचेत होने लगे, तब इन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। 21 मार्च को सबसे पहले सरोजनी (16) को संस्था के कर्मचारी बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी ले गए थे। वहां डॉक्टरों ने जांच बाद उसे मृत घोषित कर दिया था। संस्था कर्मचारी दबाव बनाकर बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव वापस ले गए। 

अब तक पांच बच्चों की मौत

संस्था के कर्मचारियों ने 23 मार्च की शाम को प्रशासन को बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने और अस्पताल में भर्ती किए जाने की सूचना दी। तब से अब तक अलग-अलग अस्पतालों में चार बच्चों की जान जा चुकी है। अफसरों का कहना है अब तक पांच बच्चों की मौत हुई है।



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