झांसी। बीडा का फर्जी अधिकारी और लेखपाल बनकर एक महिला से 12 लाख रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मुआवजे की राशि जल्द दिलाने का झांसा देकर ग्राम प्रधान ने अपने दो साथियों के साथ महिला से हस्ताक्षरित चेक ले लिए और बाद में उसके खाते से 12 लाख रुपये निकाल लिए। रक्सा थाना पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मूल रूप से मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा की रहने वाली कलावती ने पुलिस को बताया कि पति की मृत्यु के बाद वह अपने मायके में रह रही है। बरुआमाफ स्थित उसकी ससुराल की दो एकड़ जमीन बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) द्वारा अधिग्रहित की गई थी। इसके एवज में उसे 27.81 लाख रुपये का मुआवजा मिलना था।

कलावती के अनुसार, इसी दौरान बरुआमाफ के ग्राम प्रधान जगभान यादव ने उससे संपर्क कर मुआवजे की राशि जल्द दिलाने का भरोसा दिया और फरवरी में उसे झांसी बुलाया। वह अशिक्षित है, इसलिए ग्राम प्रधान की बातों पर भरोसा कर अपने देवर के साथ झांसी पहुंच गई।

आरोप है कि इमलिया चौराहे पर ग्राम प्रधान अपने दो साथियों के साथ मिला। उसने दोनों का परिचय क्रमशः बीडा के अधिकारी और लेखपाल के रूप में कराया। दोनों ने मुआवजे की प्रक्रिया पूरी कराने का भरोसा देकर उससे धोखे से चार चेकों पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बाद वह अपने गांव लौट गई।

पिछले महीने बैंक पहुंचने पर उसे पता चला कि उसके खाते में केवल 15 लाख रुपये शेष हैं। जांच कराने पर मालूम हुआ कि हस्ताक्षर कराए गए उन्हीं चार चेकों के माध्यम से 12 लाख रुपये निकाल लिए गए। जब उसने ग्राम प्रधान से इसकी शिकायत की तो आरोप है कि उसने धमकाना शुरू कर दिया।

सीओ सदर प्रिया सिंह ने बताया कि महिला की तहरीर पर ग्राम प्रधान जगभान यादव, गयादीन यादव और हेमंत कुमार अहिरवार के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, कूटरचना, अमानत में खयानत समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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किस मामले को कहते हैं अमानत में खयानत

अधिवक्ता (फौजदारी) निर्देश द्विवेदी के अनुसार अमानत में खयानत का अर्थ है किसी व्यक्ति को भरोसे या जिम्मेदारी के तहत सौंपी गई संपत्ति, धन या वस्तु का बेईमानी से अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करना या हड़प लेना। कानून के जानकारों के मुताबिक, यदि जांच में यह साबित होता है कि महिला से भरोसे में हस्ताक्षरित चेक लेकर 12 लाख रुपये निकाल लिए गए, तो पुलिस द्वारा लगाई गई धोखाधड़ी, कूटरचना और अमानत में खयानत जैसी धाराओं के आधार पर अदालत साक्ष्यों के अनुसार फैसला कर सकती है। अंतिम सजा इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-कौन से आरोप अदालत में सिद्ध होते हैं।



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