झांसी। महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल में आयोजित एमएचएमयूएन-2026 में वैश्विक सुरक्षा से लेकर संविधान तक के विषय गूंजे। इतिहास, राष्ट्रीय सुरक्षा और पत्रकारिता के मुद्दे भी आकर्षण का केंद्र बने। लोकतंत्र, नीति और राष्ट्र निर्माण पर भी बहस हुई। रविवार को दो दिवसीय सम्मेलन का समापन हो गया।
सम्मेलन के अंतिम दिन विभिन्न समितियों के 15 सत्रों के प्रतितिनिधियों ने अपने-अपने एजेंडे पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद अफ्रीकी महाद्वीप के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में मानवाधिकारों की स्थिति पर विचार-विमर्श किया। इथियोपिया, सूडान, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, मिस्र, जर्मनी, भारत सहित विभिन्न देशों की प्रतिनिधि की भूमिका निभाते हुए छात्रों ने अफ्रीका के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में मानवाधिकारों की स्थिति पर अपने-अपने देशों का पक्ष रखा और हल भी सुझाए। संयुक्त राष्ट्र महिला स्थिति आयोग ने महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी जागरूक निर्णयों एवं समग्र स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना विषय पर चर्चा की।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम समिति ने विकासशील देशों में नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा देना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मध्य-पूर्व एवं फारस की खाड़ी में हालिया संघर्षों के परिप्रेक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के समक्ष बढ़ते खतरों पर मंथर किया। स्कूल निदेशक गौरव मिश्रा ने कहा कि एमएचएमयूएन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर विचारों, नेतृत्व क्षमता और समाधान खोजने की यात्रा रही। विद्यार्थियों ने जिस गंभीरता, आत्मविश्वास से अपनी बात रखी, वह भविष्य के सक्षम नेतृत्व की झलक प्रस्तुत करता है। चेयरमैन नीरज खत्री ने कहा कि एमएचएमयूएन ने यह सिद्ध किया कि संवाद, सहयोग और कूटनीति के माध्यम से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है। चेयरपर्सन अनु मिश्रा ने कहा कि जब कोई युवा किसी राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है, तो वह केवल उस देश की आवाज नहीं बनता, बल्कि विश्व शांति और सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद का प्रतिनिधि बनता है। इस दौरान प्रधानाचार्य एस रिजवी भी मौजूद रहीं।
