पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए अभ्यर्थियों को ठहरने और आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परीक्षार्थियों का आरोप है कि न तो रोडवेज बसों में किसी प्रकार की रियायत दी गई और न ही शहर में उनके ठहरने के पर्याप्त इंतजाम किए गए। परीक्षा के दौरान होटल और धर्मशालाओं में किराया बढ़ाकर वसूला गया।

शहर स्थित धर्मशाला में स्थिति यह रही कि करीब छह गुणा छह वर्ग फुट के छोटे कमरों में तीन-तीन अभ्यर्थियों को ठहराया गया। इसके लिए प्रति परीक्षार्थी 200 रुपये लिए गए। कमरे उपलब्ध न होने पर कई अभ्यर्थियों ने कम खर्च में छत पर ही रात गुजारी। धर्मशाला में देर रात तक कमरों की तलाश में अभ्यर्थियों की भीड़ लगी रही।

होटल संचालकों पर भी परीक्षा के दौरान किराया बढ़ाने के आरोप लगे। सामान्य दिनों में 700 से 800 रुपये में मिलने वाले कमरे परीक्षा के समय प्रति व्यक्ति 1000 रुपये तक में दिए गए। वहीं एक कमरे में दो अभ्यर्थियों के ठहरने पर उनसे 600-600 रुपये वसूले गए।

मध्य प्रदेश के सीहोर से आईं अभ्यर्थी मीनाक्षी और रक्षा ने बताया कि होटल का किराया अधिक होने के कारण उन्होंने धर्मशाला में रुकना बेहतर समझा। वहीं कौशांबी से आए सुमित कुमार और शिव भूषण त्रिपाठी ने बताया कि सभी कमरे पहले से भरे हुए थे, इसलिए उन्हें छत पर ही रात बितानी पड़ी। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा के दौरान प्रशासन और होटल संचालकों को विशेष व्यवस्था और रियायतें देनी चाहिए थीं, लेकिन इसके विपरीत उनसे अधिक धन वसूला गया। इससे बाहर से आए परीक्षार्थियों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी।



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