प्रयाग उत्थान समिति की ओर से आयोजित संगम नगरी के अरैल क्षेत्र में राष्ट्र हनुमंत कथा के तीसरे दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सुंदरकांड का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि हनुमान जी के स्वभाव से स्पष्ट है कि जो राम का द्रोही है, वह उनका भी शत्रु है। उन्होंने आह्वान किया कि जिस तरह हनुमान जी ने लंका में जाकर डंका बजाया था, उसी तरह हमें भी भारत में रहकर हिंदू विरोधियों के खिलाफ डंका बजाना होगा।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य अपने मूल मार्ग से भटक गया है और आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास वाली स्थिति में फंसकर रह गया है। अगर मूल में भूल करोगे तो न जीवन जी पाओगे और न ही मंजिल तक पहुंच पाओगे। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू राष्ट्र के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि जब हम हिंदू जागृति की बात करते हैं, तो कुछ लोग हमारा विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि हमने सोए हुए हिंदुओं को जगा दिया है। वर्तमान में विडंबना यह है कि हिंदू ही हिंदू का विरोध कर रहा है और ऐसे लोगों की मंशा में खोट साफ नजर आता है।
