हाथरस के चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार और न्याय न मिलने से परेशान एक किसान ने डीजल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। आरोप है कि चकबंदी अधिकारी ने अनुपालन के आदेश करने के बदले रिश्वत ली और बाद में प्रार्थना पत्र को ही खारिज कर दिया। पीड़ित का कहना है कि उसने अपनी भैंस तक बेचकर अधिकारी की मांग पूरी की थी, लेकिन अंत में उसे निराशा हाथ लगी।

पीड़ित के अनुसार नगला गढ़ू की जमीन पर परिवार का मुकदमा साल 2012 से चल रहा है। उनके पिता राजवीर शर्मा ने 1994 में 17 बीघा जमीन का बैनामा कराया था। साल 2019 में यह मामला एटा के बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (एसओसी) के पास पहुंचा। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद छह अगस्त 2025 को फैसला उनके पक्ष में आया।

एसओसी कोर्ट से जीत मिलने के बाद फाइल नियम 109 क के तहत अमल दरामद के लिए चकबंदी अधिकारी अनिल कुमार के पास आई थी। पीड़ित देवेंद्र सिंह का आरोप है कि यहां सुनवाई के नाम पर सिर्फ ”तारीख पर तारीख” दी जा रही थी। अधिकारी बार-बार आदेश को खारिज करने की धमकी दे रहे थे। 

काम कराने के नाम पर 20 हजार रुपये की मांग की गई थी। उनके पास रुपये नहीं थे, तो उन्होंने 40 हजार रुपये में अपनी भैंस बेच दी। उसमें से 19 हजार रुपये अधिकारी को दे दिए, लेकिन काम फिर भी नहीं हुआ। जब उन्होंने रुपये वापस मांगे, तो वे टालमटोल करने लगे।



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