इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के फर्रुखाबाद के चर्चित दोहरे हत्याकांड में 39 साल बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए जीवित बचे आरोपी रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। ऐसे में उसे संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।

यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन, न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने हरीराम और अन्य की अपील पर दिया है। मामले में ट्रायल कोर्ट ने 29 जून 1987 को हरिराम सहित चार आरोपियों को हत्या मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील लंबित रहने के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद केवल रमाकांत की अपील पर सुनवाई हुई।

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन के दोनों प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की घटनास्थल पर मौजूदगी संदेहास्पद है। उनके बयान पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं। न्यायालय ने माना कि जांच और साक्ष्यों में मौजूद खामियों के कारण अभियोजन आरोप सिद्ध करने में असफल रहा। इन तथ्यों के आधार पर दोषसिद्धि और सजा को निरस्त करते हुए रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया। 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें