इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में जन्मतिथि से छेड़छाड़ को गंभीर अनियमितता माना है। कहा कि बिना कर्मचारी की सहमति किया गया कोई भी बदलाव कानूनन मान्य नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि सेवा में प्रवेश के समय दर्ज जन्मतिथि ही अंतिम मानी जाएगी। बाद में उसे मनमाने ढंग से बदला नहीं जा सकता।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अलीगढ़ निवासी यतीश सिंह की याचिका पर दिया। याची की ओर से कहा गया कि उनकी नियुक्ति 1988 में हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट में हुई थी। नियुक्ति के समय मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जन्मतिथि दर्ज की गई थी। इसी आधार पर सेवानिवृत्ति 2027 में निर्धारित थी।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 35 वर्ष बाद विभाग ने बिना सूचना दिए सेवा पुस्तिका में दर्ज जन्मतिथि में बदलाव कर दिया। वाइटनर लगाकर पुरानी तिथि हटाई गई और उसकी जगह 14 अप्रैल 1966 दर्ज कर दी गई। इसके आधार पर याची को 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।

कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि कर्मचारी को बिना सुने और बिना सहमति के इस प्रकार का संशोधन अस्वीकार्य है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याची की जन्मतिथि 19 अक्तूबर 1967 ही मान्य रहेगी और उन्हें 31 अक्टूबर 2027 तक सेवा में बने रहने दिया जाए।



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