उरई। युवक का उत्पीड़न कर रुपये वसूलने का आरोप सिद्ध होने के बाद रिटायर पुलिसकर्मी को कोर्ट ने पांच साल का कारावास और 14 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला मानवाधिकार आयोग के आदेश पर दर्ज किया गया था।
शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि कैलिया थाना क्षेत्र के ग्राम चटसारी निवासी वीरेंद्र पाल सिंह कौरव ने वर्ष 2001 में मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि कैलिया थाने में तैनात सात पुलिसकर्मी उसका उत्पीड़न कर रुपये वसूलते हैं। रुपये न देने पर फर्जी केस में फंसाने की धमकी देते हैं।
मानवाधिकार आयोग के आदेश पर सात पुलिस कर्मियों के खिलाफ रुपये वसूलने व मारपीट कर जान से मारने की धमकी देने के मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। सुनवाई से पहले पीड़ित की मृत्यु हो चुकी थी। पुलिस ने सातों पुलिस कर्मियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
22 साल बाद स्पेशल डकैती कोर्ट में चले ट्रायल के शुक्रवार को मामले की सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों की अधिवक्ताओं की जिरह और बयानों के आधार पर डकैती कोर्ट के न्यायाधीश अंचल लवानिया ने छह पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त कर दिया। वहीं थाना कृष्णानगर लखनऊ निवासी हरीलाल कश्यप को दोषी पाते हुए पांच साल के कारावास और 14 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि दोषी पुलिस कर्मी हीरालाल अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
