उरई। बाजार में चीनी के दाम एक बार फिर बढ़ गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार पड़ी है। कुछ समय पहले 55 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब फुटकर बाजार में 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। व्यापारियों के अनुसार, बाजार में चीनी की आवक कम होना इस मूल्य वृद्धि की प्रमुख वजह है।
महज कुछ समय में प्रति किलो 10 रुपये की बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। थोक बाजार में भी चीनी के दाम बढ़कर 61 से 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। ऐसे में फुटकर दुकानों पर ग्राहकों को और अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। चीनी के बढ़ते दाम का असर हर घर की रसोई पर पड़ रहा है। चाय, मिठाई, खीर और अन्य घरेलू व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाली चीनी अब महंगी हो गई है। रोजाना चाय बनाने वाले परिवारों से लेकर छोटे दुकानदारों तक के खर्च में इजाफा हुआ है। मिठाई और चाय-नाश्ते की दुकानें चलाने वाले कारोबारियों के सामने लागत का हिसाब बिगड़ रहा है। दुकानदार तैयार उत्पादों के दाम बढ़ाएंगे या बढ़ी लागत खुद वहन करेंगे, यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
थोक कारोबारी संजू गिरवासिया ने चीनी की कीमतों में तेजी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि थोक बाजार में चीनी 61 से 62 रुपये प्रति किलो बिक रही है। जबकि फुटकर बाजार में इसकी कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस तरह, थोक और फुटकर कीमतों में तीन से चार रुपये प्रति किलो का अंतर है।
महंगाई का असर कई जरूरी वस्तुओं पर पड़ने से मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। चीनी का इस्तेमाल लगभग हर घर में रोजाना होता है। 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी से परिवार की कुल मासिक खरीद पर असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, पांच किलो चीनी पर महीने में 50 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। व्यापारियों के अनुसार, आवक में सुधार होने पर कीमतों को राहत मिल सकती है, अन्यथा उपभोक्ताओं को महंगी चीनी खरीदनी पड़ेगी।
