सिरसा कलार। सहकारी समितियों के संचालकों की हड़ताल के कारण पिछले दस दिनों से डीएपी खाद का वितरण ठप है। इससे करीब 50 गांवों के किसान रबी फसलों की बोआई के लिए खाद संकट से जूझ रहे हैं। समिति संचालक वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर 22 अक्तूबर से हड़ताल पर हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
हड़ताल के चलते सिरसा कलार, जखा, दमरास और नियामतपुर की सहकारी समितियों में ताले लटके हैं। किसान रोजाना खाद मिलने की उम्मीद में समितियों तक पहुंचते हैं, पर उन्हें निराश लौटना पड़ता है। शुक्रवार को हुई हल्की बूंदाबांदी के बाद किसानों को चना, मटर, मसूर और लाही की बोआई की उम्मीद थी। खाद न मिलने से उनकी तैयारी धरी रह गई है और बोआई का समय निकलता जा रहा है। किसान खाद की तलाश में कुठौंद से नियामतपुर तक करीब 30 किलोमीटर का चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त डीएपी नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से 1600 से 1800 रुपये में डीएपी खरीदनी पड़ रही है। सहकारी समिति जखा के सचिव राजकुमार दीक्षित ने बताया कि कर्मचारी वेतनमान की मांग पर अड़े हैं।
किसानों का कहना है कि समय पर खाद न मिलने से बोआई पिछड़ जाएगी। इससे फसल की लागत भी बढ़ जाएगी और पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा। पहले से ही मौसम की मार झेल रहे किसानों के सामने अब खाद का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बारिश के बाद जिन खेतों में पलेवा हो चुका था, वहां भी खाद के अभाव में बोआई नहीं हो पा रही है।
समिति संचालकों की हड़ताल 22 अक्तूबर से जारी है। वे अपने वेतनमान को लागू कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। किसानों को उम्मीद है कि सरकार और समिति संचालक जल्द कोई समाधान निकालेंगे।

फोटो -32 जखा सहकारी समिति में लटकता ताला। संवाद

फोटो -32 जखा सहकारी समिति में लटकता ताला। संवाद

