कालपी। यमुना का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। सोमवार दोपहर जलस्तर 103 मीटर के पार पहुंच गया। 24 घंटे में करीब चार मीटर की बढ़ोतरी से यमुना की तलहटी में बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
केंद्रीय जल आयोग के प्रभारी रूपेश कुमार के अनुसार चंबल और सिंध नदी में पानी बढ़ने का असर यमुना में दिखाई दे रहा है। रविवार दोपहर से यमुना का जलस्तर करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ना शुरू हुआ जो सोमवार दोपहर तक 103 मीटर पहुंच गया। हालांकि यमुना का चेतावनी बिंदु 107 मीटर और खतरे का निशान 108 मीटर है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल बहुत ज्यादा बाढ़ की आशंका नहीं है, लेकिन जलस्तर 104 मीटर के ऊपर जा सकता है। ऐसा होने पर तहसील क्षेत्र के दो गांवों का सड़क संपर्क कट सकता है। मांगरोल-पडरी रपटे पर पानी पहुंच चुका है और अभी आवागमन जारी है, लेकिन देर शाम तक इसके बंद होने की आशंका है। वहीं तलहटी में बोई गई खरीफ की फसलों पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
एसडीएम विनय कुमार मौर्य ने बताया कि बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। यमुना तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।
ऊद में रपटे पर छह फीट से अधिक पानी, गांव का संपर्क कटा
वैकल्पिक कच्चे रास्ते पर कीचड़ और जलभराव, 17 दिन में सिर्फ एक दिन स्कूल पहुंच सके बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा कलार। यमुना का जलस्तर बढ़ने से ऊद गांव में नून नदी पर बने रपटे पर एक बार फिर छह फीट से अधिक पानी भर गया है। पानी बढ़ने से गांव का मुख्य रास्ता बंद हो गया और ग्रामीणों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। यह पांचवीं बार है जब रपटे के ऊपर इतना पानी पहुंचा है।
ग्रामीणों मनीष तोमर, राजू सेंगर, उपेंद्र सेंगर और अन्नू सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले पानी कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली थी। खेत, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए आवागमन शुरू हो गया था, लेकिन रात में अचानक पानी बढ़ने लगा। अब रपटे पर छह फीट से अधिक पानी है और जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
वैकल्पिक कच्चा रास्ता अतरछला होकर हदरुख की ओर करीब 15 किलोमीटर लंबा है। बारिश के कारण इस रास्ते पर भी कीचड़ और जलभराव है। इससे ग्रामीणों को निकलने में परेशानी हो रही है।
एसएसपी मेमोरियल स्कूल सिरसा कलार के प्रधानाचार्य बृज बिहारी ने बताया कि हथना-ऊद मार्ग पर पानी भर जाने से वाहनों का आवागमन बंद है। इस रास्ते से करीब पांच गांवों के 100 से अधिक बच्चे स्कूल आते हैं, लेकिन 15 दिन से अधिक समय से वे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार 17 दिनों में बच्चे केवल एक दिन स्कूल जा सके हैं।
बीमार ग्रामीण भी अस्पताल पहुंचने के लिए मजबूर
रास्ता बंद होने से बीमार लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार ऊद गांव निवासी प्रेम सिंह चार दिन से वायरल फीवर से पीड़ित हैं, लेकिन बाढ़ के पानी के कारण उन्हें सिरसा कलार अस्पताल ले जाना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में डॉक्टर भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।
मंगरोल-पडरी रपटा डूबा, 25 किलोमीटर का चक्कर
नौ किलोमीटर का सीधा रास्ता बंद, कच्चे मार्ग से तहसील पहुंचना बना मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
कालपी। यमुना का जलस्तर बढ़ने से नून नदी का पानी भी बढ़ गया है। मंगरौल-पडरी रपटे के ऊपर पानी चलने लगा है। पडरी गांव के लिए यही मुख्य पक्का मार्ग है। इसके डूबने के बाद ग्रामीणों को कालपी तहसील आने के लिए कच्चे रास्ते से होकर करीब 25 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा।
ग्रामीण हाकिम सिंह, मुकुट चंद्रशेखर, पप्पू, धर्मेंद्र और गजेंद्र ने बताया कि सामान्य दिनों में गांव से करीब नौ किलोमीटर का सफर तय कर सीधे कालपी पहुंच जाते हैं। रपटा डूबने के बाद वैकल्पिक कच्चे रास्ते से जाना होगा, लेकिन बारिश के कारण वहां जगह-जगह कीचड़ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रपटे पर अभी तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे कुछ लोग जान जोखिम में डालकर पानी पार कर रहे हैं।
एसडीएम विनय कुमार मौर्य ने बताया कि मौके पर लेखपाल को भेजा गया है। रपटे पर जल्द नाव की व्यवस्था कराई जाएगी, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी न हो।

फोटो – 23 यमुना नदी का बढ़ा जलस्तर। संवाद

फोटो – 23 यमुना नदी का बढ़ा जलस्तर। संवाद
