कालपी। यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच मंगलवार दोपहर करीब 103.90 मीटर पर पानी स्थिर हो गया। इससे यमुना के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों ने राहत की सांस ली है। हालांकि नून नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के खेतों में पानी भर गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हो रहा है।
केंद्रीय जल आयोग कालपी केंद्र के प्रभारी रूपेश कुमार ने बताया कि सिंध नदी का पानी आने के कारण यमुना के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई थी। रविवार को यमुना का जलस्तर करीब 98.70 मीटर था, जबकि सोमवार को यह बढ़कर 102.67 मीटर से अधिक पहुंच गया। मंगलवार दोपहर जलस्तर 103.90 मीटर दर्ज किया गया और इसके बाद बढ़ोतरी थम गई।
यमुना का चेतावनी स्तर 107 मीटर और खतरे का लाल निशान 108 मीटर है। फिलहाल जलस्तर चेतावनी बिंदु से 3.10 मीटर नीचे है। जलस्तर स्थिर होने से तटवर्ती ग्रामीणों को कुछ राहत मिली है, लेकिन प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
उपजिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य ने बताया कि यमुना के तटवर्ती क्षेत्रों की बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। प्रशासनिक टीमों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बाढ़ की स्थिति बनने पर ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
इधर, यमुना का जलस्तर बढ़ने के साथ नून नदी का पानी भी बढ़ गया है। नून नदी के आसपास किसानों की फसलें जलमग्न हो गई हैं। सोमवार शाम करीब तीन बजे से मांगरोल-पड़री रपटा के ऊपर से पानी बह रहा है। इससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो गया है। यह मार्ग आसपास के गांवों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है।
ग्रामीणों का कहना है कि रपटे पर प्रशासन की ओर से अभी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि निवर्तमान ग्राम प्रधान पड़री की ओर से नाव की व्यवस्था कराई गई है, जिससे ग्रामीण रपटा पार कर रहे हैं। इधर, प्रशासन ने रपटे पर बैरिकेडिंग करा दी है, ताकि कोई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर तेज बहाव के बीच से आवागमन न करें।

फोटो – 08 कालपी क्षेत्र में यमुना को नाव से पार करते लोग। संवाद
