फोटो- 20 जिला अस्पताल के जीरियाट्रिक वार्ड में रखे वेंटिलेटर। संवादवेंटिलेटर खरीदे, लेकिन मरीजों के काम नहीं आ रहे
= जिला अस्पताल में आईसीयू खाली, दस वेंटिलेटर कोने में पड़े
= सीएचसी में कहीं मशीन नहीं तो कहीं संचालन के लिए विशेषज्ञ नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। कोरोना काल में गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए जिले के सरकारी अस्पतालों में खरीदे गए वेंटिलेटर अब मरीजों के लिए कितने उपयोगी साबित हो रहे हैं, इसकी पड़ताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी कमी सामने आई है। जिला अस्पताल में दस वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन आईसीयू में एक भी वेंटिलेटर नहीं है। आठ वेंटिलेटर जीरियाट्रिक वार्ड में रखे हैं, जबकि एक सेफ हाउस और एक इमरजेंसी में रखा है। कोरोना काल के बाद इनका उपयोग नहीं हुआ है। इन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन की कमी है।
जिले के सीएचसी पर गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा मिलना तो दूर, कई जगह मशीन तक उपलब्ध नहीं है। जहां मशीन है, वहां उसे चलाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक या प्रशिक्षित मानव संसाधन नहीं है। ऐसे में सांस लेने में गंभीर परेशानी, हादसे या अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए स्थानीय स्तर पर जीवन रक्षक सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती।
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सीएचसी पर गंभीर मरीजों का सहारा रेफरल
कोंच। तहसील क्षेत्र की कोंच, पिंडारी और नदीगांव सीएचसी-पीएचसी में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। साथ ही वेंटिलेटर संचालन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती भी नहीं है। सांस संबंधी गंभीर समस्या या अन्य गंभीर हालत में मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करना पड़ता है। कोंच और नदीगांव क्षेत्र की बड़ी आबादी इन स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर है।
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कालपी में वेंटिलेटर ही नहीं
कालपी सीएचसी में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश कुमार बर्दिया ने बताया कि गंभीर मरीजों को कानपुर या उरई मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
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जालौन और माधौगढ़ में मशीन है, संचालन का संकट
जालौन सीएचसी में वेंटिलेटर है, लेकिन इसे संचालित करने वाला विशेषज्ञ नहीं है। यही स्थिति माधौगढ़ सीएचसी में भी है। मशीन होने के बावजूद गंभीर मरीजों के लिए इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वर्जन
वेंटिलेटर के लिए प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है। कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। – डॉ. एचएन प्रसाद, सीएमओ
