उरई। झांसी से उरई तक चार लेन हाईवे को छह लेन में बदलने की परियोजना अब भूमि अधिग्रहण के कारण नहीं अटकेगी। जिला प्रशासन ने परियोजना के लिए आवश्यक करीब 90 फीसदी जमीन का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। इसकी जानकारी कार्यदायी संस्था यूपीडा को भी दे दी गई है, जिससे अक्तूबर में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। एनएचएआई ने 135 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के लिए एक सितंबर को टेंडर जारी किए हैं, जो 22 अक्तूबर को खोले जाएंगे।
परियोजना के लिए उरई जिले में कुल 127 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। एडीएम वित्त एवं राजस्व राजीव राज ने बताया कि 90 फीसदी जमीन अधिग्रहीत कर ली गई है। शेष 10 फीसदी भूमि का अधिग्रहण भी टेंडर फाइनल होने तक पूरा कर लिया जाएगा। प्रारंभ में 137 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित थी, जिसमें से 10 फीसदी ग्राम सभा की निकली। इससे निजी भूमि अधिग्रहण का वास्तविक आंकड़ा कम हुआ।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार है। तकनीकी और वित्तीय बिड प्रक्रिया के बाद एजेंसी तय होगी। परियोजना को 730 दिन यानी करीब दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है। इसमें आरओबी और आरयूबी जैसी सभी निर्धारित सुविधाएं होंगी। यह परियोजना झांसी से उरई के बीच यातायात क्षमता बढ़ाएगी। बुंदेलखंड के इस महत्वपूर्ण मार्ग पर सफर अधिक सुगम होगा। भूमि अधिग्रहण पूरा होने से अब परियोजना टेंडर और निर्माण पर केंद्रित है।
तीन पैकेज में बंटेगा हाईवे
झांसी से उरई तक 135 किलोमीटर लंबे हाईवे को तीन पैकेज में बांटा गया है। पहला पैकेज सिजवाहा (झांसी) से सुल्तानपुरा (चिरगांव) तक होगा। दूसरा पैकेज सुल्तानपुरा से इंगुई खुर्द (कोंच) तक बनाया जाएगा। तीसरा पैकेज इंगुई (कोंच) से बंधागांव (उरई) तक का हिस्सा कवर करेगा। यह अंतिम पैकेज सीधे उरई क्षेत्र को छह लेन संपर्क से जोड़ेगा। तीनों पैकेज के लिए टेंडर एक सितंबर को जारी हुए हैं। इन टेंडरों को 22 अक्तूबर को खोला जाएगा।
43.95 अरब में बनेगा पूरा हाईवे
परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 43 अरब 95 करोड़ 71 लाख रुपये है। तीसरे पैकेज (इंगुई से बंधागांव) पर करीब 12 अरब 30 करोड़ 35 लाख रुपये खर्च होंगे। दूसरे पैकेज (सुल्तानपुरा से इंगुई खुर्द) पर 17 अरब 11 करोड़ 70 लाख रुपये का खर्च आएगा। पहले पैकेज (सिजवाहा से सुल्तानपुरा) पर 14 अरब 53 करोड़ 66 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह खर्च डीपीआर में निर्धारित सभी सुविधाओं और मानकों के अनुरूप होगा। इसमें आरओबी और आरयूबी का निर्माण भी शामिल है। परियोजना का लक्ष्य बुंदेलखंड में बेहतर सड़क बुनियादी ढांचा प्रदान करना है।
127 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की स्थिति
एडीएम वित्त एवं राजस्व राजीव राज ने बताया कि उरई जिले में परियोजना के लिए 127 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें से लगभग 90 फीसदी भूमि का अधिग्रहण कार्य पूरा हो चुका है। जिला प्रशासन ने इस प्रगति की जानकारी यूपीडा को उपलब्ध करा दी है। शेष करीब 10 फीसदी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। प्रशासन का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक यह जमीन भी उपलब्ध हो जाएगी। पहले 137 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित थी, जिसमें से 10 फीसदी ग्राम सभा की निकली। इससे निजी भूमि अधिग्रहण का वास्तविक आंकड़ा कम हुआ है।
