उरई। जिले में रबी सीजन की प्रमुख फसल हरी मटर की खेती को बढ़ावा देने के लिए जिलाधिकारी समीर ने किसानों को उन्नत खेती की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हरी मटर कम समय में तैयार होने वाली लाभकारी फसल है। इसकी फसल 60 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है।

डीएम ने बताया कि हरी मटर की खेती के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है। इसकी बोआई के लिए दोमट और मटियार दोमट मिट्टी अच्छी रहती है। अगेती फसल की बोआई सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्तूबर तक और सामान्य फसल की बोआई अक्तूबर के मध्य से नवंबर के मध्य तक की जा सकती है। प्रति एकड़ 35 से 40 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। बोआई से पहले बीजों को फफूंदनाशक और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने की सलाह दी गई है।

डीएम ने किसानों को अर्केल, काशी नंदिनी, पंत मटर-3, पंत मटर-15, आजाद मटर-3, बरुण और बोनविले जैसी उन्नत किस्मों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि मटर की फसल से फलियां प्राप्त करने के बाद बचा पौधा पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिर करने में भी सहायक होती हैं, जिससे खेत की उर्वरता बढ़ती है।



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