http://www.a2znewsup.com

पर्वत सिंह बादल ( ब्यूरो चीफ जालौन)✍️
 
(उरई जालौन) उरई:आज ग्रामीण महिलाओं को उनके भूमि एवं संपत्ति संबंधी अधिकार दिलाने और राजस्व विवादों का गांव स्तर पर ही समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक सराहनीय पहल शुरू की है। ग्राम्य विकास विभाग एवं राजस्व प्रशासन के आपसी समन्वय से स्वयं सहायता समूहों को महिलाओं के भूमि अधिकारों की आवाज बनाया जा रहा है। समूहों के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं को चिह्नित कर उनका समाधान राजस्व प्रक्रिया के तहत गांव में ही कराया जा रहा है। इस पहल से न केवल लंबे समय से लंबित मौखिक बंटवारे के मामलों को निस्तारण की दिशा मिल रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और सशक्त बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड डकोर की ग्राम पंचायत कुठौंद में मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह की उपस्थिति में मौखिक बंटवारे को कुर्रा के माध्यम से राजस्व अभिलेखों में स्थायी स्वरूप प्रदान करने की कार्यवाही संपन्न कराई गई। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार रामेंद्र सिंह एवं उपायुक्त एनआरएलएम अखिलेश तिवारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यवाही के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक परिवारों के बीच भूमि का बंटवारा आपसी सहमति से मौखिक रूप से हो जाता है, लेकिन निर्धारित राजस्व प्रक्रिया पूरी न होने के कारण अभिलेखों में उसका विधिवत अंकन नहीं हो पाता। समय बीतने के साथ यही स्थिति पारिवारिक एवं भूमि संबंधी विवादों का कारण बनती है। ऐसे मामलों को समय रहते चिह्नित कर उनका समाधान कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। समूहों के माध्यम से गांवों में महिलाओं से संवाद स्थापित कर उनकी भूमि एवं संपत्ति संबंधी समस्याओं की जानकारी प्राप्त की जा रही है। इसके बाद संबंधित राजस्व अधिकारियों के सहयोग से पात्र प्रकरणों में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराते हुए मौखिक बंटवारे को कुर्रा के माध्यम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार तहसील और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम होगी। उन्होंने कहा कि इस पहल में स्वयं सहायता समूह केवल आजीविका और आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण महिलाओं के अधिकारों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने और उन्हें न्याय दिलाने में भी प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। समूहों के माध्यम से महिलाओं को उनके भूमि अधिकारों, राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं और उपलब्ध प्रशासनिक सुविधाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
मौखिक बंटवारे को निर्धारित राजस्व प्रक्रिया के तहत अभिलेखों में दर्ज कराने से भूमि की स्थिति स्पष्ट होगी और भविष्य में एक ही भूमि को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों की आशंका कम होगी। इससे परिवारों के बीच आपसी सहमति और सौहार्द बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित कर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मा0 मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन का यह प्रयास राजस्व वादों के त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन का उद्देश्य है कि भूमि संबंधी छोटे-छोटे विवाद समय रहते गांव में ही संवाद, आपसी सहमति और विधिक राजस्व प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाए जाएं, ताकि वे भविष्य में बड़े मुकदमों का रूप न लें। स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी से शुरू हुई यह पहल ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण के साथ-साथ गांवों में सुगम न्याय और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की नई मिसाल बन रही है। इससे महिलाओं को अपने अधिकारों की पहचान मिल रही है और प्रशासन भी सीधे गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है।

By Parvat Singh Badal (Bureau Chief Jalaun)✍️

A2Z News UPParvat singh badal (Bureau Chief) Jalaun ✍🏻 खबर वहीं जों सत्य हो