उरई। कुठौंद थाने में प्रभारी निरीक्षक रहे अरुण कुमार राय की हत्या के मामले में शुक्रवार को पहली गवाही हुई। करीब सात महीने से जेल में बंद महिला कांस्टेबल मीनाक्षी शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहा किया गया। रिहाई के 24 घंटे के भीतर ही उसे दो बार अदालत पहुंचना पड़ा। शुक्रवार को हुई गवाही के दौरान मीनाक्षी करीब दो घंटे कठघरे में खड़ी रही।

कुठौंद थाने के प्रभारी निरीक्षक रहे अरुण कुमार राय की पांच दिसंबर 2025 की रात करीब 9:15 बजे सरकारी आवास में गोली लगने से मौत हो गई थी। अगले दिन उनकी पत्नी माया राय ने महिला कांस्टेबल मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने सात दिसंबर को मीनाक्षी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, यहां से उसे जेल भेज दिया गया था।

मामले की जांच सीओ जालौन शैलेंद्र बाजपेई के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने की। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने नौ मार्च 2026 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सीजेएम अभिषेक खरे की अदालत ने संज्ञान लेने के बाद मामला सत्र न्यायालय में विचारण के लिए भेज दिया। सुरक्षा कारणों से मई 2026 में मीनाक्षी शर्मा को उरई जिला जेल से झांसी जिला जेल स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की। 22 जुलाई को हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर कर दी। जमानत आदेश की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुरुवार को उसे झांसी जेल से रिहा किया गया।

रिहाई के बाद शुक्रवार को हत्याकांड की पहली गवाही के दौरान उसे फिर अदालत में उपस्थित होना पड़ा। अब मामले में अन्य गवाहों के बयान और जिरह की प्रक्रिया होगी। अदालत में इंस्पेक्टर की पत्नी माया राय की गवाही हुई। मीनाक्षी शर्मा के अधिवक्ता ने उनसे जिरह की। इसके साथ ही अभियोजन पक्ष की पहली गवाही पूरी हो गई। अब मामले की अगली गवाही 29 अगस्त को होगी।

मुंह पर मास्क लगाकर कोर्ट पहुंची मीनाक्षी शर्मा

आरोपी सिपाही मीनाक्षी शर्मा शुक्रवार को कोर्ट पहुंची। इस दौरान वह मुंह पर मास्क लगाए थी। जबकि उसके परिजन उसके साथ में थे। इस दौरान उसने किसी से कोई बात नहीं की। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह कोर्ट से निकल गई।



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