शहर में एथलेटिक्स का भविष्य ट्रैक पर दौड़ने से पहले संघर्ष करता नजर आ रहा है। सरकारी ट्रैक और प्रशिक्षकों के अभाव में युवा एथलीट निजी अकादमियों का सहारा लेने को मजबूर हैं, जहां प्रशिक्षण की भारी फीस उनके सपनों पर बोझ बन रही है। प्रतिभाएं मेहनत तो कर रही हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उनकी रफ्तार रोक रही है। यदि स्टेडियम में आधुनिक ट्रैक बन जाए और प्रशिक्षकों की नियुक्ति हो जाए, जिससे शहर की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

एथलेटिक्स संघ के सहायक सचिव शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रहे। उन्होंने कहा कि जब तक खिलाड़ियों को सही ट्रैक, प्रशिक्षक और उपकरण नहीं मिलेंगे, तब तक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना मुश्किल होगा।

प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए निजी ट्रैक पर अभ्यास करना पड़ता है, जहां फीस और अन्य खर्च मिलाकर हर महीने हजारों रुपये लग जाते हैं। कई खिलाड़ियों के परिवार यह खर्च नहीं उठा पाते।- गरिमा राजपूत, 800 मी.धावक

बेहतर कोचिंग न मिलने से तकनीकी गलतियां सुधारना मुश्किल होता है। इन सुविधाओं का लाभ लेने के लिए अकादमियों में अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।-नेशनल प्लेस होल्डर संध्या राजपूत,3000 मीटर

कई बार खिलाड़ियों को खुले मैदानों में अभ्यास करना पड़ता है, जिससे चोट लगने का खतरा बना रहता है। यदि सिंथेटिक ट्रैक और प्रशिक्षक उपलब्ध हों तो खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। – ओमी गौतम, 100 मीटर और 200 मीटर धावक

कई खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, वह निजी अकादमियों का खर्च नहीं उठा पाते। यदि यह सभी सुविधाएं स्टेडियम में हो जाएं तो एथलीट के लिए बहुत सहायक होंगी।- नेशनल खिलाड़ी प्राची राजपूत, 1500 मीटर धावक



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