खाड़ी देशों को मीट निर्यात करने वाली अल-मर्जिया एग्रो फूड्स की भगवंतपुरा स्थित फैक्टरी में जीएसटी विभाग की जांच के दौरान करोड़ों रुपये की कर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में कंपनी पर करीब 10 करोड़ रुपये का टर्नओवर कम दर्शाने, कच्चे बिलों के जरिये खरीद-बिक्री करने और 50 लाख रुपये से अधिक की टैक्स चोरी का आरोप है। विभाग ने फिलहाल 20 लाख रुपये की प्रारंभिक पेनाल्टी जमा कराई है। विस्तृत जांच में करीब 80 लाख रुपये तक की कर चोरी सामने आने की आशंका जताई जा रही है।
ज्वाइंट कमिश्नर (एसआईबी) मनीष श्रीवास्तव के नेतृत्व में जीएसटी की विशेष जांच शाखा ने बृहस्पतिवार को फैक्टरी में छापा मारा था। दूसरे दिन भी अधिकारियों ने दस्तावेजों की गहन जांच की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण अभिलेख और कच्चे बिल बरामद किए गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कंपनी खरीद और बिक्री के लिए अलग-अलग स्तर पर दस्तावेज तैयार करती थी। अधिकारियों के अनुसार, उत्पादन की तुलना में बिक्री करीब 30 प्रतिशत कम दर्ज की गई, जिससे आय कम दिखाकर कर देनदारी घटाई जाती थी। इसके अलावा कथित फर्जी खरीद आदेशों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने के भी संकेत मिले हैं।
कंपनी प्रबंधन ने जांच टीम को बताया कि भगवंतपुरा इकाई केवल पशु कटान और मीट प्रोसेसिंग (जॉब वर्क) का कार्य करती है और तैयार उत्पाद दूसरी इकाई को भेजा जाता है। इस दावे के बाद जीएसटी टीम अब फैक्टरी की वास्तविक उत्पादन क्षमता और रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। ज्वाइंट कमिश्नर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में टैक्स जमा करने में गड़बड़ी मिलने पर 20 लाख रुपये की पेनाल्टी जमा कराई गई है। जब्त दस्तावेजों में इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित कई जानकारियां स्पष्ट नहीं हैं। इस संबंध में कंपनी संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
मुरादाबाद कनेक्शन भी जांच के दायरे में
एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-वन डीके सचान ने बताया कि कंपनी ने भगवंतपुरा इकाई को मुरादाबाद की एक फर्म के लिए जॉब वर्क करने वाली यूनिट बताया है। विभाग अब दोनों इकाइयों के बीच कारोबारी संबंधों और लेन-देन की भी जांच कर रहा है।
उत्पादन और बिक्री में बड़ा अंतर, क्षमता से अधिक कटान के भी संकेत
जांच के दौरान अधिकारियों को उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों में उल्लेखनीय अंतर मिला। साथ ही, उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अनुमति से अधिक पशुओं के कटान के संकेत भी मिले हैं। इससे संबंधित दस्तावेज विभाग ने अपने कब्जे में ले लिए हैं। जीएसटी अधिकारियों के अनुसार, उन्हें पहले से इस संबंध में गोपनीय सूचना मिली थी। अब नगर निगम और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी आवश्यक अभिलेख जुटाकर तथ्यों का मिलान किया जाएगा।
100 करोड़ से अधिक का सालाना कारोबार
जीएसटी अधिकारियों के अनुसार, कंपनी का वार्षिक कारोबार 100 करोड़ रुपये से अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी का टर्नओवर लगभग 100 करोड़ रुपये रहा। यहां से तैयार मीट और अन्य उत्पादों का निर्यात ईरान, यूएई, सऊदी अरब, कतर सहित कई खाड़ी देशों में किया जाता है। जांच एजेंसियां अब निर्यात, टैक्स रिफंड और आईटीसी दावों के रिकॉर्ड का भी मिलान कर रही हैं। अंतिम स्थिति जांच और विभागीय कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगी।
