प्रेमनगर पुलिस ने साइबर ठगों के गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सात शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। जालसाजों ने खास चाइनीज गेमिंग एप को निशाना बनाते हुए उनका पेमेंट सर्वर ही हैक कर लिया था। इसमें आने वाली रकम को अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। महज आठ महीनों के भीतर करीब 42.35 करोड़ रुपये का गोलमाल करने की बात सामने आ रही है। यह सभी शातिर प्रेमनगर इलाके के रहने वाले हैं जबकि मास्टर माइंड ध्रुव नवाबाद के मेडिकल कॉलेज क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस उसे तलाश रही है।
एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने मंगलवार को मामले का खुलासा करते हुए बताया कि कई बैंकों में नए म्यूल खातों को खोल रहे प्रेमनगर के स्कूलपुरा मोहल्ला निवासी रागिब अहमद का पता चला था। उसके पास इंडोनेशिया का सिम था। पूछताछ करने पर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। रागिब ने बताया कि कुछ चाइनीज गेमिंग वेबसाइट के पेमेंट सर्वर को हैक करके उसका पैसा अपने खातों में ट्रांसफर करता है।
इन गेमिंग एप में खेलने के लिए टोकन मनी के साथ बंदूक जैसे उपकरण खरीदने के लिए 399-500 रुपये जमा करने होते थे। सर्वर हैक होने से पैसा चाइनीज कंपनी की जगह इनके बैंक खातों में आता था। एक दिन में हजारों लोगों के पैसा खाते में क्रेडिट होता था।
सर्वर क्रैक करने के बाद जिन खातों में पैसा भेजा जाता था उसे मिशन कंपाउंड निवासी सनी अमराया, पानी की टंकी निवासी सोहिल खान, नगरा निवासी अनुभव सिंह, ईसाईटोला ननासी दानिश खान, महावीरन मंदिर के पास रहने वाला सौरभ विश्वकर्मा, एवं सुमेर नगर निवासी देवेश कुमार मुहैया कराते थे। इनकी निशानदेही पर पुलिस को 114 बैंक खातों में 38 करोड़ का लेनदेन मिला। 25 दिनों में इन लोगों ने 19 बैंक खातों में 4.35 करोड़ रुपये भेजे।
गिरफ्तारी के लिए गठित की गई थी 17 सदस्यीय पुलिस टीम
सर्वर हैकरों का पता चलने के बाद उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी ने प्रेमनगर थाना प्रभारी तुलसीराम पांडेय की अगुवाई में 17 सदस्यीय टीम बनाई। साइबर से जुड़ा मामला होने के नाते विशेषज्ञ के तौर पर उपनिरीक्षक रविकांत शुक्ला को जोड़ा गया। टीम में संत प्रकाश त्रिपाठी, योगेंद्र कुमार शर्मा, अवधेश कुमार, रामदत्त समेत 17 पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया। एक साथ पुलिस ने छापा मारकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया। मंगलवार को सभी आरोपी कोर्ट के सामने पेश किए गए।
एक दिन में खाते में जमा हुए 19 लाख
चाइनीज एप पर लॉग इन करने वाले को 399 से 500 रुपये की चपत लगती थी लेकिन देश-विदेश में हजारों लोग एक साथ शिकार बन जाते थे। पेमेंट सर्वर हैक होने से खातों में मोटी रकम जमा होती थी। खातों की छानबीन करने पर मालूम चला कि मऊरानीपुर स्थित बैंक ऑफ इंडिया के एक म्यूल खाते में 19 लाख रुपये जमा हुए। राकिब के खाते में पुलिस को 37 लाख मिले। छानबीन में पता चला कि खास तौर से बैंक ऑफ इंडिया, यूपी प्रथमा बैंक एवं इंडियन बैंक में म्यूल खाते खुलते थे।
मामले की जानकारी देते एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति…
ठगी की रकम से खरीदते थे डॉलर
साइबर जालसाज बेहद शातिर हैं। पुलिस से बचने के लिए खातों से पैसा निकालने के बजाय बाइनेंस नामक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। वहां से डॉलर एवं यूआन खरीद लेते थे। काफी अधिक पैसा इन लोगों ने बाइनेंस में इस्तेमाल किया। इस पैसे को आगे कहां भेजा गया, पुलिस अभी इसका पता नहीं लगा सकी। पकड़े गए आरोपियों के बाइनेंस खाते से कुल 529 यूएसडीटी फ्रीज कराए गए। वहीं, 37.20 लाख के डिजिटल ट्रांजेक्शन का पता चला है।
रेलवे में नौकरी करता है सलाम
पुलिस को चकमा देकर भाग निकला सलाम निवासी मस्जिद के पास थाना प्रेमनगर रेलवे के कानपुर मंडल में सरकारी नौकरी करता है। वह भी रागिब के सहारे गिरोह से जुड़ा। पूछताछ के दौरान रागिब ने पुलिस को बताया कि मास्टर माइंड हर्ष से उसकी मुलाकात दिल्ली में पढ़ाई के दौरान हुई। दोनों बीसीए के छात्र थे। पुलिस के मुताबिक हर्ष गिरोह का मास्टर माइंड है। उसने ही सर्वर हैक करने की योजना बनाई थी। इसके बाद उसने अपने कुछ दोस्तों की मदद से सर्वर हैक किया। पुलिस हर्ष, सलाम समेत तीन की तलाश रही है।
