शासन के सख्त आदेश के बावजूद जिला अस्पताल की ओपीडी में रोगियों को बेधड़क बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। अधिकांश रोगियों को कम-से-कम दो दवा की पर्चियां थमाई जा रही हैं। खास यह कि जो दवा जिला अस्पताल में है, उसका विकल्प (सब्टीट्यूट) पर्ची में लिखा जा रहा है।
जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग और त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में रोगियों को तमाम रोक के बावजूद बाहर की दवाएं लिखी जा रही है। दोनों ही ओपीडी की स्थिति यह है कि डॉक्टर को दिखाने के बाद अधिकांश रोगियों के हाथ में पर्चे के अलावा बाहर की दवा लिखी पर्ची भी होती है। सूत्र बताते हैं कि जो दवाएं जिला अस्पताल में मिलती हैं, उनके विकल्प त्वचा रोग और मेडिसिन विभाग की ओपीडी में लिखी जा रही है। बुधवार को मेडिसिन विभाग की ओपीडी में रोगियों को देखते-देखते डॉक्टर उठकर बाहर चले गए। करीब पौन घंटे बाद लौटकर आए तब तक काफी भीड़ लग गई। इसके बाद डॉक्टर ने रोगियों को देखा। कई रोगियों को एंटी एलर्जिक तो कुछ को एंटीबायोटिक दवाएं बाहर की लिखी जबकि उक्त दवाओं का विकल्प अस्पताल में रोगियों के लिए आता है। कमोबेश यही हालात त्वचा रोग विभाग की ओपीडी का है।
एसआईसी डॉ. आरके सक्सेना ने बताया कि बाहर की दवाएं लिखने के बारे में पता चला है। बुधवार को जब अचानक ओपीडी का निरीक्षण किया तो दो एमआर और एक महिला मौका पाकर भाग निकले। इसको लेकर आदेश जारी कर दिया है कि किसी भी रोगी को बाहर की दवा न लिखी जाए।