दूध, पनीर, छेना से लेकर मसालों, किराना की वस्तुओं आदि में मिलावट आम बात है। अपने मुनाफे के लिए मिलावटखोर शहरवासियों की सेहत से वर्षभर खिलवाड़ करते रहते हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की नींद सिर्फ त्योहारों पर ही टूटती है। छिटपुट कार्रवाई कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है। इससे मिलावटखोरों पर शिकंजा नहीं कस पाता। अब 15 अक्तूबर से खुली मिठाइयों पर यूज बाई डेट लिखना अनिवार्य किया गया है। पहल कितनी कारगर होगी, यह आने वाला समय और एफएसडीए के रवैये से तय होगा।


बरेली में रक्षाबंधन के दौरान एफएसडीए ने 490 किलो खराब मिठाइयां और 275 किलो खराब पनीर नष्ट कराया था। कार्रवाई में बर्फी, सोहनपापड़ी और रसगुल्ला समेत कई उत्पाद शामिल थे। इसके बाद कार्रवाई थम गई। अब त्योहारों की आहट पर एक बार फिर एफएसडीए कार्रवाई के लिए कमर कस रहा है।

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एफएसडीए के सहायक आयुक्त द्वितीय राहुल कुमार सिंह ने बताया कि मिठाई की दुकान से ग्राहक ट्रे में लगी मिठाई खरीद लेते हैं, पर निर्माण तिथि आदि की जानकारी नहीं होती। 15 अक्तूबर से यह स्थिति बदलेगी। खुली मिठाइयों पर भी ‘यूज बाई डेट’ प्रदर्शित करना होगा, ताकि ग्राहक देख सकें कि उस मिठाई का सेवन कब तक किया जा सकता है।



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