पठौरिया निवासी रामकिशन प्राइवेट काम कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि पुराने मीटर से हर महीने 800-1000 रुपये बिजली का बिल आता था। मामूली कमाई से किसी तरह यह बिल चुकाते थे लेकिन, दिसंबर में प्रीपेड मीटर लगने के बाद से घर का पूरा बजट बिगड़ गया। अब हर महीने 1800-2200 रुपये बिल आ रहा है, जबकि घर में उपकरण नहीं बढ़े। यह बिल भी चुकता नहीं हो पा रहा। मंगलवार रात अचानक घर की लाइट कट गई। गर्मी में परेशान होकर रात में बिजलीघर पहुंचे लेकिन, वहां भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। दूसरे दिन उधार मांगकर उन्होंने 1250 रुपये रिचार्ज कराया, तब जाकर बिजली चालू हुई।
निगरानी की नहीं है कोई व्यवस्था
यह परेशानी सिर्फ रामकिशन की नहीं बल्कि प्रीपेड मीटर लगवाने वाले अधिकांश उपभोक्ताओं की है। पठौरिया, पंचवटी समेत आसपास के मोहल्लों के उपभोक्ताओं ने बताया कि नए प्रीपेड मीटर से घर का बजट बिगड़ गया है। मोबाइल में बैलेंस नहींं दिखता। अचानक बिजली काट दी जाती है। बिजलीघर में शिकायत के बाद भी समस्या दूर नहीं हो पाती। उनका कहना है कि प्रीपेड मीटर लगने से बिल ज्यादा आ रहा है। इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
उपभोक्ताओं का यह है कहना
स्मार्ट मीटर लगा दिया गया लेकिन उसमें कितना बैलेंस है, इसका पता नहीं चलता। अचानक बिजली कट जाती है। इसके बाद समय पर जुड़ती नहीं। गर्मी में इस वजह से काफी परेशानी हो रही है। राधिका यादव, गृहिणी
नए स्मार्ट मीटर लगने से बिजली बिल अधिक देना पड़ रहा है। घर का पूरा बजट बिगड़ गया। पहले के मुकाबले डेढ़ गुना बिल आ रहा है। बिजली कटने का भी पता नहीं चलता।
पूजा पाल, गृहणी
मीटर रि-चार्ज कराने के बावजूद बैलेंस कम दिखता है। बिजली कभी भी काट दी जाती है। इससे परेशानी उठानी पड़ती है। मजहबी मंसूरी
झांसी जोन में करीब 2.44 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। जिस उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर नहीं लगवाना है, वह मना कर सकता है। हालांकि, अभी स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने मीटर लगाने के संबंध में कोई नया आदेश नहीं आया है। रविंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता (कॉमर्शियल)
