बढ़ते तापमान के कारण शहर में बिजली की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। मात्र पांच दिनों के अंतराल में बिजली की डिमांड में 2.40 लाख यूनिट यानी 12 मेगावाट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में बिजली की मांग और बढ़ सकती है। यह गर्मी के मौसम में बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ाने वाला संकेत है।

आसमान से बरस रही आग से धरती तप रही है। जिसके कारण आमजन जीवन पूरी तरह से बेहाल है। दिन ही नही रात में भी गर्म हवाओं ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में लोगों का एक ही सहारा बिजली है। गर्मी के कारण बाजार से इलेक्ट्रानिक्स उपकरण पंखा, कूलर, एसी व फ्रीज घरों में पहुंच रहे हैं। जिसका सीधा असर बिजली पर पड़ रही है। गर्मी को दूर करने के लिए खरीदे गए इन उपकरणों से बिजली की डिमांड दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। बिजली निगम के आंकड़ों पर गौर करें तो 16 मई को बिजली की पीक डिमांड 380 मेगावाट थी। लगातार बढ़ते पारे और गर्म हवाओं के चलते यह मांग 20 मई को बढ़कर 392 मेगावाट तक पहुंच गई। इस प्रकार पांच दिन में कुल 12 मेगावाट की वृद्धि हुई है। दिन-प्रतिदिन बढ़ती डिमांड बिजली विभाग के लिए चुनौती बनती जा रही है। दोपहर के समय जब तापमान चरम पर पहुंचता है, तब बिजली की खपत सबसे ज्यादा होती है। शाम के समय भी घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली की मांग बनी रहती है। इससे ट्रांसफार्मर और फीडरों पर अतिरिक्त लोड पड़ रहा है। बिजली अधिकारियों का मानना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो जून महीने में डिमांड 400 मेगावाट के पार भी जा सकती है।

कूलर वाले एसी तो एक एसी वाले दो या तीन लगा रहे

बढ़ती गर्मी के कारण घरों में कूलर, पंखा और एसी की मांग बढ़ गई है। जिसके पास कूलर है वह एसी लगवा रहा है। कई घरों में एक नहीं दो से तीन एसी लग रहे हैं। अभी हाल में ही एक भाजपा नेता के घर बिजली टीम ने चोरी पकड़ी थी। जिसके घर पर करीब तीन एसी लगे हुए थे। ठीक इसी तरह रहे घरों व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों की बिक्री से बिजली की डिमांड बढ़ रही है।

 इस दिन इतने मेगावाट और यूनिट की हुई डिमांड

16 मई- 380 मेगावाट

17 मई- 382 मेगावाट

18 मई- 390 मेगावाट

19 मई- 390 मेगावाट

20 मई- 392 मेगावाट

गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली की डिमांड भी बढ़ रही है। पांच दिनों में करीब 12 मेगावाट बिजली की डिमांड बढ़ी है। गर्मी का हाल यही रहा तो आगे भी डिमांड बढ़ सकती है। अनमोल, डागौर, एक्सईएन, ट्रांसमिशन



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