जिला अस्पताल की ओपीडी में उपचार के लिए आने वाले रोगियों को बाहर की दवाएं लिखने के मामले को महानिदेशक ने गंभीरता से लिया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से जवाब तलब किया गया है। जिससे शुक्रवार को अस्पताल में हड़कंप मचा रहा।
अमर उजाला में बृहस्पतिवार को ‘जिला अस्पताल में मरीजों को थमाई जा रही बाहर की दवाओं की पर्ची’ शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई। जिसमें बताया गया कि मेडिसिन और त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले अधिकांश रोगियों को बाहर की दवाओं की पर्चियां थमा दी जाती हैं। ऐसा बाहरी दवा दुकानों की मिलीभगत से किया जा रहा है क्योंकि जिन दवाओं की पर्चियां थमाई जाती हैं, वह अस्पताल में रोगियों को नि:शुल्क देने के लिए आती हैं। ऐसा उस हालत में किया जा रहा है जबकि शासन-प्रशासन अनावश्यक तरीके से बाहरी दवाएं लिखने पर सख्ती से रोक लगा चुका है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि अमर उजाला की खबर पर महानिदेशक ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला अस्पताल के एसआईसी डाॅ. आरके सक्सेना से जवाब तलब किया है।
ओपीडी में दलालों को रोकने के लिए लगाई टीमें
जिला अस्पताल की ओपीडी में दलालों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए एसआईसी डॉ. आरके सक्सेना ने टीमों को लगा दिया है। उन्होंने बताया कि स्पष्ट हिदायत दी गई है कि ओपीडी के समय एक भी दवा कंपनी का एजेंट दिखना नहीं चाहिए। इसके अलावा दलाल भी नजर नहीं आने चाहिए। डाक्टरों से भी कहा गया है कि वह अस्पताल में उपलब्ध दवाएं ही रोगियों लिखें। कतई बाहर से दवा खरीदने की पर्ची नहीं थमाई जाए। ब्यूरो
