मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। कोई वायरल संक्रमण से बुखार, खांसी और शरीर दर्द से परेशान है तो कोई डिहाइड्रेशन के कारण उल्टी-दस्त की चपेट में आ रहा है। मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन और बाल रोग विभाग की ओपीडी में इन दिनों करीब 60 फीसदी मरीज वायरल संक्रमण से पीड़ित पहुंच रहे हैं। इनमें कई मरीजों की हालत गंभीर होने पर भर्ती भी करना पड़ रहा है।
इन दिनों कभी तेज धूप तो कभी सामान्य मौसम के कारण तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में ठंडे पेय पदार्थों का सेवन और लापरवाही लोगों को बीमार बना रही है। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि वायरल संक्रमण के मरीजों में बुखार के साथ खांसी, शरीर दर्द और कमजोरी की शिकायत अधिक मिल रही है। कई मरीजों को 24 घंटे बाद अत्यधिक थकान महसूस हो रही है।
उन्होंने बताया कि मेडिसिन विभाग की ओपीडी में करीब 60 फीसदी मरीज वायरल संक्रमण के पहुंच रहे हैं। इनमें कई मरीजों को बुखार और खांसी के साथ शरीर दर्द की शिकायत है, जबकि कुछ लोग डिहाइड्रेशन की समस्या से भी जूझ रहे हैं। ओपीडी और इमरजेंसी से रोज करीब 22 मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि बच्चों में भी वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। बाल रोग ओपीडी में करीब 55 फीसदी बच्चे वायरल संक्रमण से पीड़ित पहुंच रहे हैं। वहीं उल्टी-दस्त से पीड़ित बच्चों की संख्या भी बढ़कर करीब 35 फीसदी तक पहुंच गई है। गंभीर हालत में रोजाना करीब 12 बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
दो दिन में राहत न मिले तो डॉक्टर को दिखाएं
डॉ. जकी सिद्दीकी ने सलाह दी कि बुखार या शरीर दर्द होने पर पैरासिटामोल ली जा सकती है और खांसी में घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं। यदि दो दिन में राहत नहीं मिले तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक, दर्द निवारक या एंटी एलर्जिक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे समस्या बढ़ सकती है।
सात से नौ दिन में मिल रही राहत
चिकित्सकों के अनुसार सामान्य तौर पर वायरल संक्रमण तीन से चार दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इस बार मरीजों को सात से नौ दिन तक परेशानी बनी रह रही है। अपने मन से दवाएं लेने पर कई लोगों में बुखार और बढ़ रहा है।
इन दवाओं की बढ़ी मांग
वायरल संक्रमण और उल्टी-दस्त के मामलों में बढ़ोतरी के चलते बाजार में लिवोसिट्राजिन-मोंटेलुकास्ट, पैरासिटामोल, आइबूप्रोफेन, मेफेनैमिक एसिड, ओन्डेनसेट्रॉन, ओफ्लोक्सासिन-ऑर्निडाजोल, पैंटोप्राजोल-डोमपेरिडोन, एजिथ्रोमाइसिन, क्लैरिथ्रोमाइसिन, प्री-प्रोबायोटिक और ओआरएस की मांग बढ़ गई है।
