बड़ागांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में 20 दिन से जलभराव है। इससे मरीजों को मुख्य गेट से ओपीडी और इमरजेंसी तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। अस्पताल परिसर में लंबे समय से पानी भरा होने से मच्छरजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। समस्या से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ। यानी, जहां लोगों का इलाज होता है, अब उसी परिसर को अपनी समस्या के ‘इलाज’ का इंतजार है।

सीएचसी परिसर में पानी भरा होने से मरीजों और तीमारदारों को पानी से होकर ओपीडी और इमरजेंसी तक पहुंचना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, जलभराव की समस्या के संबंध में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराया गया है। दो बार उच्च अधिकारियों और स्थानीय विधायक को भी समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। सीएचसी के सीएमएस डॉ. वैभव पुरोहित ने बताया कि अस्पताल परिसर नीची जगह पर है। इसी वजह से हर वर्ष जलभराव की समस्या होती है। समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पिछले वर्ष भी इसके समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

प्रसव पीड़ा में पानी से गुजरी गर्भवती

स्थानीय निवासी अनूपा जोशी ने बताया कि आठ सितंबर को उनकी बहू वंदना को प्रसव पीड़ा हुई। मध्यरात्रि करीब दो बजे वह बहू को लेकर अस्पताल पहुंचीं। परिसर में जलभराव देखकर परेशानी हुई। प्रसव पीड़ा अधिक होने के कारण मजबूरी में बहू को पानी से होकर अस्पताल तक ले जाना पड़ा। वृद्ध मरीज अशोक निरंजन ने बताया कि उम्र अधिक होने के कारण उन्हें उपचार के लिए सीएचसी जाना पड़ता है। कई दिनों से परिसर में जलभराव है, जिससे ओपीडी तक पहुंचने में दिक्कत होती है। डॉक्टर ने फॉलोअप जांच के लिए बुलाया था, लेकिन जलभराव की वजह से अस्पताल जाने में डर लग रहा है। पानी में गिरने या चोटिल होने की आशंका बनी रहती है।

यह बोले सीएमओ

सीएचसी बड़ागांव के आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण परिसर में जलभराव होता है। मोटर लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है। समस्या से बीडीओ को अवगत कराकर स्थायी निदान कराने के लिए कहा गया है। – डॉ. शिशिर पुरी, सीएमओ



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