झांसी। नगर निगम कार्यकारिणी की छह खाली सीटों के लिए महापौर बिहारी लाल आर्य ने चुनाव की तारीख का एलान कर दिया। 21 अगस्त को इन सीटों के लिए चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव तारीख के एलान के साथ ही नगर निगम के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। भाजपा पार्षदों के बीच कार्यकारिणी में जाने के लिए सबसे तेज जोर आजमाइश छिड़ी हुई है।
कार्यकारिणी के छह सदस्यों का दो साल का कार्यकाल 20 जून को पूरा हो गया। कार्यकाल पूरा हो जाने की वजह से उपसभापति आशीष तिवारी समेत दिनेश प्रताप सिंह, मुकेश सोनी, मोनिका गुप्ता, प्रवीण लखेरा और महेश गौतम कार्यकारिणी से बाहर हो गए। इसके बाद से इन सीटों पर चुनाव का इंतजार किया जा रहा था। भाजपा के 45 पार्षदों में 21 पार्षद अब तक कार्यकारिणी में जा चुके। 24 पार्षद अभी भी मौके के इंतजार में है। ऐसे थे जिनको अभी तक कार्यकारिणी में जगह नहीं मिली थी, अब चुनाव की तारीख सामने आने के बाद उनकी सक्रियता बढ़ गई। वहीं, सबसे अधिक संख्या होने की वजह से भाजपा के सामने अधिकतम सीटें हासिल करने की चुनौती है। निगम सदन में भाजपा के पास करीब दो तिहाई बहुमत है। इसके अलावा सात नामित सदस्य भी भाजपा के साथ हैं। ऐसे में भाजपा की स्थिति सबसे मजबूत है वहीं, विपक्षी दल एक जुट होने पर ही एक सीट आसानी से जीतने की क्षमता रखते हैं। विपक्षी खेमे को भी अपनी यह सीट बचाने की चुनौती होगी। महापौर बिहारी लाल आर्य के मुताबिक चुनाव के लिए समय तय कर दिया गया है। चुनाव के बाद बैठक बुलाई जाएगी।
दो महीने से खाली हैं छह सीटें
20 जून को कार्यकाल पूरा होने के बाद पांच भाजपा और एक बसपा पार्षद कार्यकारिणी से बाहर हो गए। इसके बाद से छह सीटें रिक्त हो गई थीं। जुलाई के अंत तक चुनाव की तारीख तय नहीं होने से पार्षदों में बेचैनी बढ़ने लगी थी। इस वजह से कार्यकारिणी की बैठक भी नहीं हो पा रही थी।
उपसभापति के लिए भी होगा चुनाव
उपसभापति आशीष तिवारी के भी कार्यकारिणी से बाहर हो जाने की वजह से उपसभापति का भी चुनाव कराया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि 21 अगस्त के बाद तुरंत ही उपसभापति के लिए भी चुनाव कराए जा सकते हैं।
इस वजह से कार्यकारिणी अहम
नगर निगम कार्यकारिणी में बजट, विकास योजनाओं, वित्तीय प्रस्तावों और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामलों में अहम भूमिका होती है। कार्यकारिणी विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा के साथ कई प्रस्तावों पर सदन से पहले विचार करती है। ऐसे में कार्यकारिणी में जाने के लिए हर पार्षद के बीच होड़ रहती है।
