झांसी। मसाले के साथ औषधीय उपयोग में भी सौंफ की मांग बनी रहती है। इसे देखते हुए रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को अक्तूबर के मध्य से नवंबर के प्रथम सप्ताह तक बोआई करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सही समय पर बोआई, उन्नत किस्मों का चयन और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
विश्वविद्यालय के बागवानी उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के बागान, मसाले, औषधीय एवं सगंध पादप विभाग के वैज्ञानिक डॉ. एस भार्गव किरण और डॉ. रघुवीर सिलारू ने बताया कि सौंफ एक महत्वपूर्ण बीजीय मसाला फसल है। बुंदेलखंड के किसान अजमेर सौंफ-1, अजमेर सौंफ-2, अजमेर सौंफ-3, गुजरात सौंफ-11, आरएफ-101, आरएफ-125 और आरएफ-205 किस्मों का चयन कर सकते हैं।
एक हेक्टेयर में सौंफ की बोआई के लिए 10 से 12 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है। बोआई के दौरान कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर और बीज की गहराई एक से दो सेंटीमीटर रखें।
