झांसी/ललितपुर। लंपी चर्म रोग (एलएसडी) ने दुधारू पशुओं के साथ पशुपालकों की कमाई पर भी चोट शुरू कर दी है। झांसी के बंगरा, बबीना और गरौठा ब्लॉक में कई पशु बीमार मिले हैं। बंगरा ब्लॉक के जावन में एक गोवंश की मौत हो चुकी है, जबकि ललितपुर के बार क्षेत्र में सैकड़ों पशु प्रभावित बताए जा रहे हैं। यहां दूध उत्पादन 50 से 70 फीसदी तक घट गया है। इसके मद्देनजर विभाग की ओर से पशुपालकों के लिए अलर्ट जारी किया गया है।

झांसी के सकरार और जावन में करीब तीन दिन पहले दो-दो पशुओं में लंपी के लक्षण सामने आए थे। पशुपालन विभाग की टीम ने इन पशुओं के खून और त्वचा के नमूने लेकर जांच के लिए मथुरा और बरेली स्थित प्रयोगशालाओं में भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पशुओं को वास्तव में लंपी रोग है या नहीं।

इसी बीच शनिवार को रक्सा क्षेत्र में भी दो पशुओं में लंपी जैसे लक्षण मिलने की सूचना पशुपालन विभाग को मिली। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार को टीम भेजकर दोनों पशुओं की सैंपलिंग कराई जाएगी। इसके बाद नमूनों की जांच रिपोर्ट के आधार पर बीमारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

गायों के शरीर पर निकल रहीं बड़ी-बड़ी गांठें

ललितपुर के विकासखंड बार की ग्राम पंचायत बम्होरी खुर्द, धमना और बार में दुधारू पशुओं के बीमार होने से पशुपालकों में हड़कंप है। ग्रामीणों के अनुसार प्रभावित गायों के शरीर पर बड़ी-बड़ी गांठें निकल रही हैं। पशुओं को तेज बुखार आ रहा है, वे चारा खाना छोड़ रहे हैं और उनकी आंखों से पानी निकल रहा है। बीमारी के कारण दूध उत्पादन में भारी गिरावट आई है। ललितपुर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भगवान सिंह ने बताया कि वैक्सीन उपलब्ध हो गई है। जिन गांवों में पशुओं में बीमारी के लक्षण सामने आए हैं, वहां जानकारी लेकर तत्काल टीकाकरण कराया जाएगा।

बार गांव के किसान अनुपम गोस्वामी ने बताया कि उनका पशु तीन दिन से खाना नहीं खा रहा है और इसकी जानकारी पशु चिकित्सक को दी गई है। बम्होरी खुर्द के किसान राजा ने बताया कि उनके पशु की आंख से लगातार पानी निकल रहा है। पशुपालकों का कहना है कि कई गांवों में अब तक बड़े स्तर पर टीकाकरण नहीं हुआ है।

झांसी में भी पशुओं में लंपी रोग की आशंका के चलते पशुपालन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। अपर निदेशक ग्रेड-2 पशुपालन अरविंद कुमार सागर और बंगरा की पशु चिकित्सा अधिकारी सोनम दीक्षित के नेतृत्व में टीम ने सकरार और जावन में पशुओं के टीकाकरण का सत्यापन किया। संदिग्ध पशुओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।

जावन निवासी पशुपालक रवि कुशवाहा ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी गाय में सूजन और फफोले दिखाई दिए थे। निवाड़ी, मध्य प्रदेश से निजी चिकित्सक से उपचार कराने के बावजूद गाय की मौत हो गई। इसके बाद पशु को वैज्ञानिक विधि से दफनाया गया। अन्य पशुओं भी इसके लक्षण देखे गए हैं। यह बीमारी करीब 15 दिन से फैली हुई है।

ककरबई और गरौठा क्षेत्र में भी गोवंश में बीमारी को लेकर चिंता बढ़ी है। प्रभारी पशुचिकित्साधिकारी गरौठा रनवीर सिंह ने टीम भेजकर संक्रमित पशुओं का उपचार कराया। साथ ही गोवंश का टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।

लक्षणों के आधार पर उपचार शुरू

पशुपालन विभाग ने रोकथाम और नियंत्रण के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की हैं। इनमें पशु चिकित्सक, पशुधन प्रसार अधिकारी और पैरा-वेट्स को शामिल किया गया है। संदिग्ध क्षेत्रों में सकरार और जावन में टीमें तैनात कर निगरानी की जा रही है। प्रभावित पशुओं का लक्षणों के आधार पर उपचार शुरू कर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों के पांच किलोमीटर के दायरे में रिंग वैक्सीनेशन अभियान भी शुरू किया गया है।

ये हैं लंपी जैसे प्रमुख लक्षण

– त्वचा पर गांठें या फफोले होना

– तेज बुखार आना

– सुस्ती और कमजोरी

– भूख कम होना या चारा छोड़ देना

– पैरों में सूजन

– आंख और नाक से पानी आना

– दूध उत्पादन में कमी

पशुपालक बरतें ये सावधानी

पशु चिकित्सकों के अनुसार बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए। पशुबाड़े की नियमित सफाई करें और मच्छर-मक्खियों तथा अन्य कीटों से बचाव के उपाय करें। पशुओं को साफ पानी और पौष्टिक चारा दें। बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें।

मऊरानीपुर में 9000 डोज मिलीं

मऊरानीपुर में पशुपालन विभाग को पिछले सप्ताह लंपी से बचाव के लिए 9000 डोज मिली हैं। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश चंद्र शाक्य ने बताया कि अब तक 500 से अधिक गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। नगर पालिका और ग्रामीण गोशालाओं में टीकाकरण पूरा हो गया है। भंडरा और अक्सेव के पशु चिकित्सा केंद्रों पर वैक्सीन उपलब्ध है।

बंगरा में 16 हजार गोवंश की निगरानी

बंगरा में करीब 16 हजार गोवंश की निगरानी की जा रही है। मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. सोनम दीक्षित के अनुसार विभाग को दो हजार डोज मिली हैं और टीकाकरण जारी है। बिजना गांव के पशुपालक राघवेंद्र पस्तोर ने गांव में टीकाकरण न होने की शिकायत की है।

मोंठ में 500 से अधिक पशुओं का टीकाकरण

मोंठ में भी लंपी के संक्रमण को देखते हुए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेंद्र यादव ने बताया कि अब तक 500 से अधिक गोवंश को लंपी का टीका लगाया जा चुका है। गोशालाओं और गांवों में एहतियातन टीकाकरण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पांच सितंबर तक खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए 48 हजार से अधिक गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। लंपी का टीकाकरण 30 अगस्त से शुरू हुआ है। जिन पशुओं को खुरपका-मुंहपका का टीका लगाया गया है, उन्हें 20 दिन के अंतराल के बाद ही लंपी का टीका दिया जा रहा है।

इनपुट- मऊरानीपुर, बंगरा, मोंठ, लोहारी, ककरबई से इनपुट



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