झांसी। झांसी शहर की रोजाना पेयजल जरूरत करीब 120 एमएलडी है लेकिन पारीछा बांध से हर दिन करीब 100 एमएलडी पानी लीकेज के कारण नदी में बहकर बर्बाद हो रहा है। यानी बांध से रोज बहने वाला पानी शहर की कुल दैनिक जरूरत का करीब 83 फीसदी है। पारीछा बांध के 318 गेटों में लीकेज की यह समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। अब सिंचाई विभाग ने पानी की इस बर्बादी को रोकने के लिए गेटों की मरम्मत कराने की तैयारी की है। इसके लिए 2.46 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मंजूर किया गया है।

सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1875 में पारीछा गांव में बांध का निर्माण कराया गया था। बांध के निर्माण में पत्थर, चूना और सुर्खी का इस्तेमाल हुआ था। पानी को रोकने और स्टोर करने के लिए 318 लोहे के गेट लगाए गए थे। करीब डेढ़ सौ साल पुराने ये गेट अब जगह-जगह से खराब हो चुके हैं। इनमें लीकेज के कारण बांध में रोका गया पानी लगातार नदी में जाता रहता है।

अभियंताओं के मुताबिक बांध का मूल ढांचा अभी भी मजबूत है लेकिन लोहे के पुराने गेटों में लीकेज की समस्या है। बारिश के बाद पानी रोकने के लिए गेटों के लीकेज वाले हिस्सों को पतली लकड़ी और सन की मदद से अस्थायी तौर पर बंद किया जाता है। हालांकि, यह व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं टिकती। जलीय जीव इन सामग्रियों को काट देते हैं, जिसके बाद पानी फिर बहने लगता है।

हर दिन 100 करोड़ लीटर पानी की बर्बादी

एक एमएलडी यानी 10 लाख लीटर। इस हिसाब से पारीछा बांध से रोज करीब 100 करोड़ लीटर पानी नदी में बह रहा है। दूसरी ओर झांसी शहर की मौजूदा आबादी की पेयजल जरूरत करीब 120 एमएलडी प्रतिदिन बताई गई है। इस लिहाज से बांध से रोज बर्बाद होने वाला पानी शहर की दैनिक जरूरत का करीब 83 फीसदी है।

हालांकि, झांसी की पेयजल आपूर्ति के लिए जल निगम पारीछा बांध पर निर्भर नहीं है। शहर में पानी की आपूर्ति के लिए माताटीला और पहूज बांध से पानी लिया जाता है। इसके बावजूद जल संकट और जल संरक्षण के लिहाज से पारीछा से इतनी बड़ी मात्रा में पानी का बहना चिंता का विषय है।

2.46 करोड़ से सुधारे जाएंगे 318 गेट

पानी की बर्बादी रोकने के लिए बेतवा प्रखंड ने बांध के सभी 318 गेटों की मरम्मत और सुधार के लिए 2.46 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे मंजूरी मिल गई है। इसके तहत गेटों के लीकेज को दूर करने और उन्हें बेहतर स्थिति में लाने के काम कराए जाएंगे। सिंचाई अधिकारियों का दावा है कि धनराशि जारी होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा और इसी वित्तीय वर्ष में इसे पूरा करने का लक्ष्य है।

केन-बेतवा परियोजना में बदलेंगे सभी गेट

पारीछा बांध को केन-बेतवा लिंक परियोजना से जोड़ने का भी प्रस्ताव है। परियोजना के तहत बांध के सभी 318 गेटों को बदले जाने और इसे प्यानो डैम की तर्ज पर विकसित किए जाने की योजना है। इससे बांध का संचालन और जल प्रबंधन बेहतर होने की उम्मीद है। इस पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

सिंचाई अधिकारियों के मुताबिक केन-बेतवा परियोजना का काम शुरू होने में अभी करीब पांच वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में तब तक पानी की बर्बादी रोकने के लिए मौजूदा गेटों में सुधार जरूरी है। इसी को देखते हुए फिलहाल 2.46 करोड़ रुपये से गेटों की मरम्मत कराई जाएगी।


गेटों से होने वाले लीकेज को दूर करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। इसे मंजूरी मिल गई है। धनराशि जारी होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। – बृजेश कुमार पोरवाल, अधिशासी अभियंता, बेतवा प्रखंड



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *