झांसी। महानगर में पिटबुल पालने वालों पर नगर निगम ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पिछले 17 महीने में नगर निगम ने पिटबुल पालने वाले 16 लोगों पर पांच-पांच हजार रुपये के हिसाब से कुल 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। कार्रवाई के बाद पिटबुल को आबादी क्षेत्र से बाहर फार्म हाउस आदि में रखवाया गया और पालकों से शपथपत्र भी लिया गया।
नगर निगम के पशुपालन विभाग के अनुसार महानगर में पिटबुल पालने की शिकायत मिलने पर टीम मौके पर पहुंचकर जांच करती है। पिटबुल पालने की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति को नोटिस दिया जाता है और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता है। इसके बाद इस नस्ल के कुत्ते को आबादी क्षेत्र से बाहर रखने की व्यवस्था कराई जाती है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 13 पर कार्रवाई
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 13 पिटबुल पालकों पर कार्रवाई की गई थी। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 31 अगस्त तक तीन पालकों पर जुर्माना लगाया जा चुका है। इस तरह पिछले 17 महीने में 16 पालकों से 80 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। कार्रवाई के बाद पालकों से शपथपत्र भी लिया गया है कि पिटबुल को आबादी क्षेत्र में नहीं रखा जाएगा।
1959 कुत्तों का पंजीकरण
नगर निगम में अब तक 1959 कुत्तों का पंजीकरण हो चुका है। इनमें देसी और विदेशी दोनों नस्ल के कुत्ते शामिल हैं। विदेशी नस्ल के कुत्ते का 200 रुपये और देसी नस्ल के कुत्ते का 100 रुपये पंजीकरण शुल्क निर्धारित है।
नगर निगम के अनुसार एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के सर्वे के आधार पर शहरी क्षेत्र में पांच से छह फीसदी परिवारों में कुत्ता या बिल्ली पाले जाने का अनुमान है। इस हिसाब से महानगर में पांच हजार से अधिक घरों में कुत्ते पाले जाने का अनुमान है। 31 मार्च 2026 तक 1125 कुत्तों का पंजीकरण हुआ था। इसके बाद मौजूदा वित्तीय वर्ष में 31 अगस्त तक 834 और कुत्तों का पंजीकरण कराया गया है।
बिना पंजीकरण कुत्ता पालने पर लगेगा जुर्माना
डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि बिना पंजीकरण कुत्ता पालने पर दो हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है। उन्होंने सभी कुत्ता पालकों से पंजीकरण कराने और हर साल उसका नवीनीकरण कराने की अपील की है।
पंजीकरण इसलिए जरूरी
– नगर निगम की ओर से समय-समय पर लगाए जाने वाले शिविरों में निशुल्क टीकाकरण की सुविधा मिलती है।
– कुत्ता खो जाने पर एफआईआर दर्ज कराने के दौरान पंजीकरण का ब्योरा मांगा जाता है।
– सार्वजनिक परिवहन से कुत्ते को ले जाने में भी पंजीकरण उपयोगी होता है।
जब पिटबुल हुआ हिंसक
केस-1 : नोंच-नोंचकर बछड़े को मार डाला
अगस्त 2023 में सीपरी बाजार के नालगंज निवासी बुजुर्ग महिला अपने पिटबुल डॉग को सड़क पर घुमा रही थीं। इसी दौरान पिटबुल ने वहां घूम रहे बछड़े पर हमला कर दिया। महिला से रस्सी छुड़ाकर डॉग बछड़े पर टूट पड़ा और उसे नोंच-नोंचकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। कुछ देर बाद बछड़े की मौत हो गई। मामले में सीपरी बाजार पुलिस ने गोपालक की तहरीर पर पिटबुल के मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
केस-2 : डेढ़ मिनट तक जबड़े में दबाए रखा हाथ
सितंबर 2025 में सीपरी बाजार क्षेत्र के मसीहागंज में पालतू पिटबुल के हमले का वीडियो सामने आया था। कुत्ते ने एक महिला पर हमला कर उसके हाथ को जबड़े में जकड़ लिया और उसे जमीन पर गिरा दिया। महिला की चीख सुनकर मकान मालिक और आसपास के लोग पहुंचे। करीब डेढ़ मिनट की मशक्कत के बाद महिला को डॉग से अलग कराया जा सका। महिला को बचाने के दौरान मकान मालिक की बेटी भी घायल हो गई थी।
महानगर में ऐसे कुत्ते पालने की शिकायत मिलने पर टीम जांच करती है और पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। नगर निगम की ओर से पिटबुल का पंजीकरण नहीं किया जाता है। – डॉ. राघवेंद्र सिंह, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगम
