झांसी। मलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत लोगों की जांच के मामले में झांसी प्रदेश के चार निचले जिलों में शामिल हो गया है। बीते अगस्त तक जिले में वार्षिक रक्त जांच दर (एबीईआर) महज 4.38 फीसदी पाई गई, जो कि शासन की ओर से निर्धारित न्यूनतम लक्ष्य से भी कम है। इस पर शासन स्तर से आपत्ति जताई गई है।

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मलेरिया की जांच बढ़ाना जरूरी है। ताकि बुखार से पीड़ित किसी संभावित मलेरिया रोगी की जांच और उपचार से वंचित न हो। शासन स्तर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2026 तक एबीईआर की उपलब्धि निर्धारित लक्ष्य से कम होना संबंधित जिलों के मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के प्रति अपेक्षित सक्रियता न होना दर्शाता है। इस पर संचारी/ वेक्टर जनित रोग के निदेशक ने झांसी समेत पांच फीसदी से कम एबीईआर वाले 10 जिलों के सीएमओ को पत्र लिखा है। इसमें न्यूनतम पांच से सात फीसदी एबीईआर की उपलब्धि प्राप्त करने के लिए संबंधित अधिकारी को निर्देश जारी करने के लिए कहा है।

क्या है एबीईआर

एबीईआर मलेरिया निगरानी में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख सूचकांक है। इसके जरिये आबादी के अनुपात में कितने लोगों की रक्त जांच की गई, इसका आकलन किया जाता है। मलेरिया की प्रभावी निगरानी के लिए इसकी उपलब्धि अहम मानी जाती है।

ये चार जिले प्रदेश में सबसे फिसड्डी

जनपद एबीईआर

भदोही 3.87

कौशांबी 4.08

मेरठ 4.19

झांसी 4.38

(नोट: एबीईआर प्रतिशत में।)

वर्जन..

झांसी में एबीईआर प्रतिशत कुछ कम मिला है। इस पर सभी सीएचसी, पीएचसी के प्रभारियों को इसमें वृद्धि करने के निर्देश जारी कर दिया गया है।

-डॉ. शिशिर पुरी, सीएमओ।



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