झांसी। मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, बीमारी नहीं। इसके बावजूद इससे जुड़े शारीरिक और मानसिक बदलावों को लेकर कई महिलाओं में जानकारी का अभाव रहता है। कोई इसे बीमारी समझकर परेशान होती है, तो कोई लक्षणों को उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज को समझना, जीवनशैली में जरूरी बदलाव करना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

वर्ल्ड मेनोपॉज डे का उद्देश्य भी महिलाओं को इस अवस्था के प्रति जागरूक करना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। इस अवसर पर महिला रोग विशेषज्ञों ने बताया कि आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज होता है। इस दौरान अंडाशय की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटता है। इससे मासिक धर्म अनियमित होने के बाद बंद हो जाता है। लगातार 12 महीने तक मासिक धर्म नहीं आने पर मेनोपॉज माना जाता है। यह बदलाव हर महिला में अलग-अलग तरह से दिखाई दे सकता है।

गर्मी लगना, बेचैनी और नींद में परेशानी

मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. सिप्पी अग्रवाल ने बताया कि मेनोपॉज के दौरान हार्मोन में बदलाव के कारण अचानक गर्मी लगना, पसीना आना, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद में परेशानी और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। इस दौरान हड्डियों का घनत्व कम होने से ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड मेनोपॉज डे महिलाओं को इन बदलावों की जानकारी देने और समय पर उचित सलाह लेने के प्रति जागरूक करने का अवसर है।

हृदय और हड्डियों की सेहत का रखें ध्यान

महिला जिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका चौधरी ने बताया कि एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से कुछ महिलाओं में रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है। योनि और मूत्र मार्ग में होने वाले बदलावों के कारण कुछ महिलाओं को बार-बार मूत्र मार्ग में संक्रमण की समस्या भी हो सकती है। मनोदशा में बदलाव, उदासी और नींद की कमी जैसी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं।

उन्होंने बताया कि मेनोपॉज के दौरान संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और हड्डियों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। मेनोपॉज जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत है।

कम उम्र में मेनोपॉज के संकेतों को न करें नजरअंदाज

परिवार में मां या किसी अन्य महिला को कम उम्र में मेनोपॉज हुआ हो, तो आनुवंशिक कारणों से इसकी आशंका बढ़ सकती है। 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होना सामान्य उम्र से पहले की स्थिति है। यदि इस उम्र में मासिक धर्म अनियमित होने या मेनोपॉज जैसे लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।



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