झांसी। अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार को गाजे-बाजे के साथ गणपति प्रतिमाओं का जलाशयों में विसर्जन किया गया। ‘गणपति बप्पा मोरया… अगले वर्ष तू जल्दी आ’ के उद्घोष के बीच नगर के विभिन्न स्थानों पर विराजमान गणपति बप्पा को रिमझिम बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ विदाई दी।
ढोल-नगाड़ों की धुन पर महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग झूमते नजर आए। पंडालों और घरों से जब गणपति की प्रतिमाएं निकलीं तो ऊपर से मेघ बरस रहे थे, वहीं भक्तों की आंखों से आंसू छलक रहे थे।
बड़ाबाजार रामलीला मंच पर बुंदेलखंड के राजा, मिसुरिया वाली गली में सबसे अधिक आभूषणों से सजे गणपति, मानिक चौक के राजा, एलबीएम गेट नंबर-दो के सामने विराजमान गणपति और सदर बाजार के राजा समेत अन्य प्रतिमाओं को नगर भ्रमण के बाद पहूज समेत विभिन्न नदियों और जलाशयों में विसर्जित किया गया। लक्ष्मी गेट बाहर बाल गंगाधर राव पार्क के सामने बने कुंड और लक्ष्मी मंदिर के पास लक्ष्मी तालाब में भी प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।
विसर्जन से पहले श्रद्धालुओं ने शंख और झालरों के साथ विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आरती की। इसके बाद गुलाल उड़ाते और नाचते हुए भक्तों ने प्रतिमाओं को विसर्जित किया। अंतिम विदाई के समय कई श्रद्धालु भावुक होकर सुबकते नजर आए।
सुरक्षा के लिए लगाए बैरिकेड
आवास विकास शिवपुरी रोड स्थित अनुसुइया घाट और खोड़न के चेकडैम स्थित अनुसुइया घाट पर भी गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। सुरक्षा की दृष्टि से यहां जाल लगाकर बैरिकेड किए गए थे, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। नगर निगम की ओर से सफाई की व्यवस्था भी की गई थी। प्रतिमाओं का विसर्जन कराने के लिए गोताखोर भी सक्रिय रहे।
इसके अलावा ग्वालियर रोड स्थित सिमरधा बांध पर पहूज नदी में छोटी-बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। गढ़मऊ झील और नोटघाट पुल के पास भी प्रतिमाएं विसर्जित की गईं। इन स्थानों पर विसर्जन से पहले श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की आरती की।
सफाई और सुरक्षा व्यवस्था रही दुरुस्त
नगर निगम के कर्मचारी अजय, रवि, अरुण, संजय और गोलू लक्ष्मी तालाब पर सफाई व्यवस्था संभालते नजर आए। उन्होंने बताया कि तालाब में विसर्जन के बाद फूल-मालाओं और अन्य सामग्री को बाहर निकाला जा रहा है। साथ ही विसर्जन के बाद बची प्रतिमाओं को भी तालाब से बाहर निकाला जा रहा है, ताकि सफाई व्यवस्था बनी रहे।
विसर्जन स्थलों पर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था भी दुरुस्त रही। नगर निगम कर्मचारी मनोज कुमार राय समेत अन्य कर्मचारी भी व्यवस्थाएं संभालने में जुटे रहे। शिवपुरी रोड स्थित पहूज नदी के अनुसुइया घाट पर भी पुलिसकर्मी तैनात रहे।
जो मिल गया, वही हमारे लिए गणपति का प्रसाद
गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन कराने वाले लक्ष्मी गेट बाहर निवासी निशांत रायकवार ने कहा कि वे किसी श्रद्धालु से कुछ मांगते नहीं हैं। कोई जितना रुपया दे देता है, उसे गणपति का प्रसाद मानकर रख लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए लोगों की सुरक्षा सबसे पहले है।
पुरानी नझाई निवासी नितिन और छनियापुरा निवासी रिबू कुशवाहा ने बताया कि वे 10 से 50 रुपये तक मेहनताना लेते हैं। कोई श्रद्धालु रुपये नहीं देता है तो वे बिना कुछ लिए भी गणपति की प्रतिमा का विसर्जन कर देते हैं। उनका कहना है कि इसके बदले गणपति सालभर उन्हें और उनके परिवार को सुखी रखते हैं।
गणपति की प्रतिमा विराजमान कराने से होती है सुखद अनुभूति
लक्ष्मी गेट बाहर गणपति प्रतिमा का विसर्जन करने आए दतिया गेट निवासी महेंद्र साहू ने बताया कि वह 25 साल से घर में गणपति की प्रतिमा विराजमान करा रहे हैं। आगे भी दोगुने उत्साह से गणपति को विराजमान कराएंगे।
इतवारी गंज निवासी नरेश ने बताया कि वह पांच साल से घर में गणपति की प्रतिमा विराजमान करा रहे हैं। पुरानी नझाई निवासी दिनेश कुमार लखेरा ने बताया कि उनके घर में करीब 70 साल से गणपति की प्रतिमा विराजमान कराई जा रही है। उनका कहना है कि गणपति को विराजमान कराने से मन को काफी अच्छा लगता है।
बंगला घाट निवासी उमेश वर्मा ने बताया कि वह भी कई वर्षों से घर में गणपति की प्रतिमा विराजमान करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गणपति को घर में विराजमान कराने से सुखद अनुभूति होती है। उनका विश्वास है कि गणपति घर में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
धर्माचार्यों की अपील मानी, नहीं किया डीजे का इस्तेमाल
जिला धर्माचार्य की डीजे न बजाने की अपील का असर गणपति विसर्जन यात्राओं में भी दिखाई दिया। खटकयाना के दरीगरान के गणेशजी की विसर्जन यात्रा आयोजकों ने ढोल के साथ निकाली। आयोजकों ने कहा कि गणेश पंडालों और विसर्जन यात्राओं में डीजे का इस्तेमाल ठीक नहीं है। यह हमारी परंपरा का हिस्सा भी नहीं है।
इसी तरह बिसाती बाजार की मिठाई वाली गली से रघुवीर महाराज के गणपति की विसर्जन यात्रा भी ढोल की धुन पर निकाली गई। यात्रा निकालने वाले ऋतिक तिवारी ने कहा कि वे चाहते तो डीजे के साथ भी गणपति को ले जा सकते थे, लेकिन धर्माचार्य की अपील का पालन करना जरूरी समझा।
बड़ागांव गेट पुलिस चौकी के पास के गणपति की विसर्जन यात्रा भी ढोल के साथ निकाली गई। यात्रा संयोजकों ने कहा कि डीजे का इस्तेमाल न कर वे सादगी बनाए रखेंगे। यही हमारी धार्मिक परंपरा है।
आम लोग भी बोले- धार्मिक आयोजनों में न हो डीजे का इस्तेमाल
बड़ाबाजार के दुकानदार संतोष चौरासिया ने कहा कि डीजे की तेज आवाज से बच्चों और बुजुर्गों के साथ स्वस्थ व्यक्ति को भी परेशानी हो सकती है। सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में इसका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। धर्माचार्यों की अपील का पालन किया जाना चाहिए।
फल विक्रेता इस्राइल ने कहा कि किसी भी धर्म का कार्यक्रम हो, डीजे की तेज आवाज नुकसानदायक है। इसे धार्मिक आयोजनों से दूर रखा जाना चाहिए। इतवारी गंज निवासी आरिफ ने भी धार्मिक आयोजनों में डीजे का इस्तेमाल बंद करने की बात कही। बड़ाबाजार के पान विक्रेता ओमप्रकाश चौरसिया ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में डीजे के बजाय शंख, झालर और ढोल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

बारिश की फुहार के साथ धूमधाम से गणपति को विसर्जन करने जाते श्रद्धालु। संवाद

बारिश की फुहार के साथ धूमधाम से गणपति को विसर्जन करने जाते श्रद्धालु। संवाद

बारिश की फुहार के साथ धूमधाम से गणपति को विसर्जन करने जाते श्रद्धालु। संवाद
