झांसी। प्रशासन ने परिषदीय विद्यालयों के जर्जर भवनों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने बच्चों की सुरक्षा के लिए 100 दिन की समय सीमा तय की है। उन्होंने अधिकारियों को काम में देरी या गुणवत्ता से समझौता न करने के निर्देश दिए।
विकास भवन में रविवार को हुई समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों को विद्यालय परिसर में रखना अप्रिय घटनाओं को न्योता देता है। ऐसे भवनों का तत्काल ध्वस्तीकरण कराकर निर्माण कार्य शुरू किया जाए। एसडीएम गरौठा को पूर्व माध्यमिक विद्यालय जखौरा के लिए तत्काल भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्माण एजेंसियों को गुणवत्ता के मामले में कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मानक के अनुरूप कार्य न होने पर कार्रवाई और वसूली की जाएगी। अधिशासी अभियंता को हर स्तर पर तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए गए।
जर्जर भवनों पर कार्रवाई
वर्ष 2024-25 में ध्वस्तीकरण के लिए मिले 26 जर्जर भवनों पर तीन दिन में कार्रवाई पूरी करने के लिए कहा गया। इनमें बामौर का एक, मोंठ के पांच, चिरगांव के तीन और मऊरानीपुर के 17 भवन शामिल हैं। वहीं वर्ष 2025-26 में चिह्नित 107 जर्जर भवनों की सत्यापन एवं मूल्यांकन रिपोर्ट भी तीन दिन में मांगी गई है।
नए निर्माण कार्य और निगरानी
समग्र शिक्षा के तहत 39 प्राथमिक विद्यालय भवन, 20 उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन और नौ अतिरिक्त कक्षा-कक्ष स्वीकृत हैं। इन सभी को 100 दिन के भीतर पूरा कराने का लक्ष्य तय किया गया है। इन कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारियों को सौंपी गई है। मुख्य विकास अधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि जिन विद्यालयों में रसोईघर नहीं हैं, वहां निर्माण के लिए प्रस्ताव तत्काल दिए जाएं। बैठक में खंड विकास अधिकारी सुनील कुमार सिंह, शिखर कुमार श्रीवास्तव, खंड शिक्षा अधिकारी वेद प्रकाश सिंह, सहायक अभियंता तीर्थराज यादव, रमेश चन्द्र गुप्ता डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर निर्माण इकाई और अवर अभियंता मनोज लाक्षाकार सहित समस्त अवर अभियंता मौजूद रहे।
