उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग की ओर से जनपद के छह केंद्रों पर कराई गई प्रवक्ता की परीक्षा के पहले ही दिन 62 फीसदी परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। दो पालियों में परीक्षा के दौरान कई परीक्षार्थी सांख्यिकी और इतिहास के सवालों में उलझ गए। मनोविज्ञान, शिक्षाशास्त्र के सवाल परीक्षार्थियों को आसान लगे।
पहली पाली की परीक्षा शनिवार को सुबह 09:30 से 11:30 बजे तक चली। परीक्षा में 2117 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें 815 उपस्थित और 1302 अनुपस्थित रहे। दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर ढाई बजे से शाम साढ़े चार बजे तक चली। इसमें पंजीकृत 1875 परीक्षार्थियों में 684 उपस्थित और 1191 अनुपस्थित रहे। वहीं, एडीएम प्रशासन शिव प्रताप शुक्ल और एसपी सिटी प्रीति सिंह ने आयोग के प्रेक्षक डॉ. अखिलेश मिश्रा के साथ केंद्रों का भ्रमण किया। प्रधानाचार्य कक्ष में बने कमांड कंट्रोल रूम का भी जायजा लिया। कक्षाओं में लगे सीसीटीवी कैमरे से कक्ष में परीक्षा दे रहे छात्र-छात्राओं को भी देखा। मिनट-टू-मिनट रिकॉर्डिंग की भी जानकारी ली।
यह बोले परीक्षार्थी
पिछले छह वर्षों से होम साइंस प्रवक्ता बनने की तैयारी कर रही हूं। पेपर में ज्यादातर प्रश्न उसी पैटर्न के आए, जिसकी तैयारी की थी। इसलिए प्रश्नपत्र हल करने में कठिनाई नहीं हुई। – हसीना, बांदा।
पिछले पांच वर्षों से प्रवक्ता परीक्षा की तैयारी कर रही हूं। पेपर कुल मिलाकर अच्छा रहा, लेकिन मानव विकास के प्रश्नों से थोड़ी परेशानी हुई। प्रसार शिक्षा के प्रश्न औसत स्तर के थे। – पूजा गुप्ता, बांदा।
एजुकेशन से प्रवक्ता के लिए छह साल से तैयारी के साथ एक संस्थान में शिक्षण कार्य भी कर रही हूं। पेपर कठिन नहीं था। सांख्यिकी के सवालों में थोड़ा समय लगा। मनोविज्ञान के प्रश्न आसान थे। – शिवाली त्रिपाठी, जालौन।
शिक्षाशास्त्र, दर्शनशास्त्र के प्रश्न बेहद सरल थे, लेकिन सांख्यिकी और इतिहास के प्रश्नों को हल करने में परेशानी हुई। इन विषयों में अधिक समय लगने से समय प्रबंधन में परेशानी हुई। – अभय मिश्रा, प्रयागराज।
