नई दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग अब 160 किमी की रफ्तार से ट्रेनों को दौड़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गया है। इतनी रफ्तार पर ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए इसको कवच वर्जन-4.0 की आधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस कर दिया गया है। गाजियाबाद के चिपयाना बुजुर्ग रेलवे स्टेशन से टूंडला जंक्शन तक 184 किमी लंबे रेलखंड पर काम पूरा हो चुका है। उत्तर मध्य रेलवे के अनुसार कवच वजर्न-4.0 की सुरक्षा से लैस यह देश का पहला रेलखंड बन गया है।
उत्तर मध्य रेलवे द्वारा विकसित इस परियोजना को भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा कदम माना जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह देश का पहला ऐसा रेलखंड है, जहां 160 किमी प्रति घंटे की गति के लिए कवच वर्जन 4.0 को सफलतापूर्वक चालू किया गया है। इस तकनीक का उद्देश्य सिग्नल पासिंग, टक्कर और अन्य मानवीय त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है। दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर रोजाना सैकड़ों यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां गुजरती हैं। ऐसे में कवच प्रणाली लागू होने से इस रूट की सुरक्षा और परिचालन क्षमता दोनों में सुधार होगा।
उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत शेखर त्रिपाठी ने बताया कि जल्द ही वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और दूरंतो समेत अन्य तेज गति वाली ट्रेनों के संचालन में भी इसका प्रयोग होगा। परियोजना के तहत पूरे खंड में आधुनिक संचार प्रणाली और निगरानी ढांचा विकसित किया गया है। 22 रेलवे स्टेशन और नौ लेवल क्रॉसिंग पर कवच सुरक्षा प्रणाली के उपकरण लगाए गए हैं। इस प्रणाली के विस्तार से न केवल ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में हाई-स्पीड रेल संचालन की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। अलीगढ़ होकर गुजरने वाले व्यस्त रेल मार्ग पर यात्रियों को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का अनुभव मिलेगा।
रफ्तार और सुरक्षा
- 184 किमी लंबे रेलखंड पर लागू हुई अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली
- 22 रेलवे स्टेशन और नौ लेवल क्रॉसिंग पर उपकरण लगाए गए
- कवच वर्जन-4.0 की सुरक्षा से लागू देश का पहला रेलखंड बना
- अलीगढ़ और हाथरस जंक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों की होगी सुरक्षा
- वंदे भारत, शताब्दी, राजधानी और दूरंतो में जल्द लगेंगे उपकरण
