उत्तर प्रदेश से दूसरे राज्यों को तेंदुए स्थानांतरित करने का सिलसिला जल्द शुरू हो सकता है। उड़ीसा और कर्नाटक के वन विभाग के अधिकारियों की इस संबंध में यूपी के अधिकारियों से वार्ता चल रही है। स्थानांतरण का यह सिलसिला शुरू होने पर उत्तर प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।

प्रदेश में हर साल ही मानव-वन्यजीव संघर्ष में काफी लोग मारे जाते हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 60 लोगों की जान गई थी, जबकि 220 लोग घायल हुए थे। यूपी में वर्ष 2018 में 173 बाघ थे, जिनकी संख्या 2022 की गणना में बढ़कर 205 हो गई।

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वर्ष 2022 की वन विभाग की गणना के अनुसार, यूपी में तेंदुए 848 थे, लेकिन विभाग के ही कुछ अधिकारी इस गणना पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें गन्ने के खेत में रहने वाले तेंदुओं की गिनती शामिल नहीं है। करीब एक हजार तेंदुए तो बिजनौर में ही जंगल से बाहर खेतों में बताए जा रहे हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि तेंदुओं और बाघों को राज्य के भीतर इनकी अधिक संख्या वाले स्थानों से कम संख्या वाले जंगलों में स्थानांतरित कर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है। यह प्रयोग उत्तराखंड और मध्यप्रदेश पहले से कर रहे हैं। अन्य राज्यों को भी इन्हें स्थानांतरित करके समस्या पर काफी हद काबू पाया जा सकता है।

यूपी इन दिनों इन दोनों ही तरह की शिफ्टिंग की योजना पर काम कर रहा है। वन विभाग के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, उड़ीसा के अधिकारियों से एक राउंड की बात भी हो चुकी है। कर्नाटक समेत एक-दो अन्य राज्य भी इसमें रुचि ले रहे हैं। यूपी को अभी इन राज्यों के लिखित प्रस्ताव का इंतजार है, जिसके बाद आगे बढ़ा जाएगा।



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