लखनऊ के विकासनगर की उस झुग्गी बस्ती में अब आग की लपटें नहीं हैं, लेकिन हर तरफ बिखरी राख और जले हुए सामान अब भी उस भयावह रात की गवाही दे रहे हैं। हवा में घुली जलेपन की गंध के बीच जब सुबह की धूप उतरती है, तो खंडहर बने आशियानों के बीच खेलते बच्चों की आंखों में डर, दर्द और उम्मीद तीनों एक साथ दिखाई देते हैं। यही वे बच्चे हैं, जिनके हाथों में कभी किताबें और सपने थे, लेकिन आज वही हाथ राख के ढेर में अपना भविष्य तलाशते नजर आते हैं।

सात वर्षीय राधा और नौ साल की कालिंदी अपनी मां सुमित्रा देवी के साथ जले हुए घर के सामने बैठकर पढ़ाई करने की कोशिश कर रही थीं। उनकी पुरानी किताबें और कॉपियां आग में जल चुकी हैं, लेकिन किसी अनजान मददगार ने उन्हें नई कॉपियां और बैग दे दिए। राधा मासूमियत से अपनी कॉपी दिखाते हुए कहती है कि ये मेरी नई हिंदी की कॉपी है… मैं पढूंगी… उसकी आवाज में दर्द से ज्यादा दृढ़ता झलकती है।




Lucknow: Childhood burnt to ashes in a fire, dreams still alive, innocent girl said- I will study

– फोटो : amar ujala


पास बैठी मां सुमित्रा देवी की आंखें भर आती हैं। वह कहती हैं, घर तो फिर बन जाएगा, लेकिन पढ़ाई छूट गई तो सब खत्म हो जाएगा। पांच साल पहले पति की मौत के बाद से वह घरों में काम कर किसी तरह बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं।


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कुछ दूरी पर नौ साल की परी अपनी सहेली सात साल की शगुन के साथ खड़ी है। वह बिना पूछे ही धीमे स्वर में कहती है, मेरा गुड़िया वाला डिब्बा भी जल गया… और फिर चुप हो जाती है। शायद उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उसका बचपन यूं राख में बदल गया।


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– फोटो : amar ujala


बस्ती में कई बच्चे हैं, जो अब खेलते नहीं, बल्कि चुपचाप अपने माता-पिता को देखते रहते हैं। माता-पिता बांस और तिरपाल के सहारे फिर से छत खड़ी करने में जुटे हैं, जबकि कुछ कुछ बच्चे भी उनके साथ हाथ बंटा रहे हैं। हालात ने उन्हें वक्त से पहले बड़ा बना दिया है।


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अग्निकांड की जांच होगी, 13 मई तक मांगी रिपोर्ट

वहीं, हाईकोर्ट ने विकास नगर में 15 अप्रैल को हुए अग्निकांड मामले में लोक निर्माण विभाग की जमीन पर अतिक्रमण होने के मुद्दे पर विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को जांच करने का आदेश दिया है। उन्हें अपना रुख भी बताना होगा। कोर्ट ने प्रदेश के राहत आयुक्त को भी मामले में जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही पक्षकार अफसरों को घटना का विवरण, कारण, राहत के उपायों के ब्योरे के साथ 13 मई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।




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